अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में निवेश को घटाकर 17 साल के निचले स्तर पर ला दिया
US-China Trade War (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : अप्रैल 2025 में जब से अमेरिका ने अपने व्यापार में बदलाव करते हुए नई टैरिफ नीति अपनाई है तभी से वैश्विक स्तर पर व्यापार के मायने बदल गए हैं। अमेरिका की नई टैरिफ पॉलिसी में बदलाव के चलते जहां प्रत्येक देश नए व्यापारिक संबंद्ध तलाश रहा है वहीं विकसित देश अमेरिका की इस पॉलिसी के खिलाफ नई रणनीति अपना रहे हैं। इन्हीं देशों में चीन भी शुमार है जिसने ऐसी रणनीति तैयार की है कि आने वाले दिनों में अमेरिका बैकफुट पर आ सकता है।
दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव कायम
चीन ने अमेरिका के साथ तनावपूर्ण संबंधों और अपने विदेशी मुद्रा भंडार के विविधीकरण की रणनीति के तहत अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में निवेश को घटाकर 17 साल के निचले स्तर पर ला दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर 2025 में चीन की अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग्स घटकर 682.6 अरब डॉलर रह गईं, जो अक्तूबर में 688.7 अरब डॉलर थीं। यह स्तर 2008 के बाद सबसे कम है।
खास बात यह है कि ऐसे समय में जब चीन ने अपनी हिस्सेदारी घटाई, अमेरिकी कर्ज में विदेशी निवेश रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। आंकड़ों के अनुसार, जापान और ब्रिटेन ने अपनी होल्डिंग्स बढ़ाई हैं। जापान का निवेश 2.6 अरब डॉलर बढ़कर 1.2 ट्रिलियन डॉलर हो गया, जबकि ब्रिटेन की हिस्सेदारी 10.6 अरब डॉलर बढ़कर 888.5 अरब डॉलर पहुंच गई।
चीन के पास दुनिया का सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दिसंबर 2025 के अंत तक चीन के पास दुनिया का सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार है, जो 3.3579 ट्रिलियन डॉलर है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका से जुड़े परिसंपत्तियों में कटौती चीन की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह अपने रिजर्व को सोना, गैर-अमेरिकी मुद्राएं और विदेशी इक्विटी निवेश की ओर स्थानांतरित कर रहा है। शंघाई यूनिवर्सिटी आॅफ फाइनेंस एंड इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर शी जुनयांग ने कहा कि हाल के वर्षों में विदेशी परिसंपत्तियों के बेहतर अनुकूलन और विविधीकरण से चीन के पोर्टफोलियो की सुरक्षा और स्थिरता मजबूत हुई है।
चीन अपने स्वर्ण भंडार में कर रहा विस्तार
इस बीच, चीन अपने सोने के भंडार को लगातार बढ़ा रहा है। पीपुल्स बैंक आॅफ चाइना के अनुसार, दिसंबर 2025 के अंत तक चीन का गोल्ड रिजर्व 74.15 मिलियन औंस पहुंच गया, जो पिछले महीने की तुलना में 30,000 औंस अधिक है। यह लगातार 14वां महीना है जब केंद्रीय बैंक ने सोने का भंडार बढ़ाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में भी चीन सोने की खरीद जारी रख सकता है, ताकि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच अपने रिजर्व को अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।

