Global Warming, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: भारत समेत दुनिया भर में कहीं जंग चल रही है तो कहीं इन दिनों अजीब मौसमी घटनाएं हो रही हैं। भारत में नौतपा के बीच बारिश हो रही है। समय से पहले मानसून दस्तक दे रहा है और समुद्र का तापमान काफी बढ़ चुका है। इस बीच मौसम विशेषज्ञों ने बेहद पावरफुल ‘सुपर अल नीनो’ की चेतावनी दी है जिससे चिंता और बढ़ गई है।
प्रशांत महासागर में विकसित हो रही ‘अल नीनो’ की स्थिति
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक प्रशांत महासागर में बहुत तेजी से ‘अल नीनो’ की स्थिति विकसित हो रही है और 100 साल में पहली बार यह बेहद शक्तिशाली हो सकता है। प्रशांत महासागर में होने वाले इस परिवर्तन का सीधा असर भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ता है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि यह मौसमी घटना प्रशांत महासागर को खौला रही है। 1877 में भी दुनिया भर में ‘सुपर अल नीनो’ आया था और इसके कारण करोड़ों लोग काल का ग्रास बन गए थे। 1877 से 1878 के ‘सुपर अल नीनो’ को मौसम की सबसे विनाशकारी घटनाओं में से एक माना जाता है।
पूरी दुनिया का मौसम हो सकता है उलट-पुलट
विश्व भर के मौसमी विशेषज्ञों ने चेताया है कि वैश्विक तापमान के चलते यह मौसमी गतिविधि इस बार भयंकर रूप ले सकती है। यह पूरी दुनिया के मौसम को उलट-पुलट कर सकता है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार इस साल मई से जुलाई के बीच ‘सुपर अल नीनो’ के पूरी तरह प्रभावी होने की आशंका है। उनका कहना है कि प्रशांत महासागर में समंदर की सतह का सामान्य से काफी तेजी के साथ बढ़ रहा है। ‘सुपर अल नीनो’ की वजह से इस बार मानसून कमजोर पड़ सकता है जिसके कारण मध्य भारत और उत्तर पश्चिम में भीषण हीटवेव यानी लू और सूखे का संकट पैदा हो सकता है।
सामान्य तौर पर होती है 870 एमएम बारिश
भारत में मानसून में सामान्य तौर पर 870 एमएम बारिश होती है, लेकिन इस बार इसके 800 अथवा इससे भी कम रहने का अनुमान है। भारत में तकरीबन 60 फीसदी खेती मानसून की बारिश पर निर्भर है और यदि बारिश कम होती है तो इसका सीधा असर खरीफ की फसलों पर होगा। फसलों की पैदावार घटने से किसानों के सामने रोज-रोटी की समस्या बन सकती है। खराब मानसून के कारण सीधे तौर पर खाने-पीने की चीजें (सब्जियां और दालें) महंगी होती हैं और पीने के पानी की भी कमी हो जाती है।
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