INS Taragiri, (द भारत ख़बर), विशाखापत्तनम: समुद्र में भारत की ताकत और बढ़ गई है। इंडियन नेवी को आज दो और नए शक्तिशाली हथियार मिल गए। इनमें से एक युद्धपोत आईएनएस तारागिरी और दूसरा आईएनएस अरिदमन हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में आईएनएस तारागिरी को कमीशन किया। यह युद्धपोत भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट 17ए के तहत एक एडवांस्ड स्टेल्थ फ्रिगेट है और अब दुश्मन देश भारतीय समुद्री क्षेत्र पर नजर भी नहीं उठा सकेंगे।
लगातार बढ़ रहा रणनीतिक और समुद्री महत्व
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी और चीफ आॅफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान के साथ-साथ भारतीय नौसेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहे थे। तारागिरी को ऐसे समय में शामिल किया गया है, जब भारत के पूर्वी समुद्री तट का रणनीतिक और समुद्री महत्व लगातार बढ़ रहा है। इसकी मुख्य वजह क्षेत्रीय सुरक्षा के बदलते समीकरण और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती भागीदारी है।
आपरेशनल क्षमता को मजबूत करने पर फोकस
तारागिरी को कमीशन किया जाना नौसेना के उस निरंतर प्रयास को दर्शाता है, जिसके तहत वह अपने महत्वाकांक्षी बेड़ा विस्तार कार्यक्रम के माध्यम से अपनी युद्धक तत्परता और आॅपरेशनल क्षमता को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। प्रोजेक्ट 17ए श्रेणी के चौथे शक्तिशाली प्लेटफॉर्म के रूप में, तारागिरी केवल एक जहाज नहीं है, यह 6,670 टन का एक ऐसा प्रतीक है, जो ‘मेक इन इंडिया’ की भावना और हमारे स्वदेशी शिपयार्ड की अत्याधुनिक इंजीनियरिंग क्षमताओं को दर्शाता है।
स्टेल्थ मोड में आपरेशन करने में सक्षम
मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) द्वारा निर्मित, यह फ्रिगेट पिछली डिजाइनों की तुलना में एक पीढ़ीगत छलांग है। इसका आकार अधिक सुव्यवस्थित है और इसका ‘रडार क्रॉस-सेक्शन’ काफी कम है, जिससे यह अत्यंत गुप्त तरीके से (स्टेल्थ मोड में) आॅपरेशन करने में सक्षम है। 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ, यह जहाज हमारे घरेलू औद्योगिक इकोसिस्टम की परिपक्वता को उजागर करता है। इस इकोसिस्टम में अब 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) शामिल हैं, जो भारत सरकार की ‘आत्मनिर्भरता’ पहलों में योगदान देने के साथ-साथ हजारों भारतीयों को रोजगार भी प्रदान करते हैं।
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