दिल्ली : दिल्ली हाई कोर्ट ने छतरपुर के सतबड़ी गांव में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की ओर से चलाए जा रहे बुलडोजर एक्शन पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित नियमों की कथित अनदेखी के आरोपों के बाद उठाया गया है। कोर्ट ने DDA से इस मामले में जवाब मांगा है, और अगली सुनवाई 18 अगस्त 2025 को होगी। यह फैसला स्थानीय निवासियों और पर्यावरणविदों के विरोध के बीच आया है, जो इस कार्रवाई को गैरकानूनी बता रहे हैं।
हादसे का विवरण
हाल ही में DDA ने सतबड़ी गांव में सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने के नाम पर बुलडोजर चलाया था, जिसमें कई घरों और संपत्तियों को नुकसान पहुंचा। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस कार्रवाई के लिए उन्हें उचित नोटिस नहीं दिया गया, और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि क्या DDA ने बिना अनुमति के संपत्तियों को ध्वस्त किया, जो कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन हो सकता है।
SC नियमों की अनदेखी का आरोप
सुप्रीम कोर्ट ने पहले साफ किया था कि किसी भी डिमॉलिशन से पहले प्रभावित लोगों को नोटिस और पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। सतबड़ी गांव के मामले में, निवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि DDA ने इन नियमों को नजरअंदाज किया और बिना उचित प्रक्रिया के कार्रवाई की। खासकर, रिज क्षेत्र में पेड़ों की कटाई और सड़क निर्माण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, जो पर्यावरण नियमों का उल्लंघन हो सकता है।
कोर्ट का आदेश और अगली कार्रवाई
दिल्ली हाई कोर्ट ने DDA को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि क्या इस कार्रवाई में सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का पालन हुआ या नहीं। कोर्ट ने बुलडोजर एक्शन पर तत्काल रोक लगाते हुए स्थिति को यथावत रखने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई में DDA को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी, और इस दौरान कोई नई तोड़फोड़ नहीं होगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया और चिंताएं
सतबड़ी गांव के निवासी इस फैसले से राहत महसूस कर रहे हैं, लेकिन वे डीडीए की मनमानी से नाराज हैं। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “हमारे घर बिना नोटिस के तोड़े जा रहे थे, यह अन्याय है।” दूसरी ओर, पर्यावरणविदों ने रिज क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को लेकर चिंता जताई और इसे दिल्ली के पर्यावरण के लिए खतरा बताया।
दिल्ली हाई कोर्ट का यह कदम सतबड़ी गांव में बुलडोजर एक्शन पर रोक लगाकर निवासियों को राहत दे सकता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट नियमों की अनदेखी के आरोपों की जांच का परिणाम इस मुद्दे की दिशा तय करेगा। 18 अगस्त को होने वाली सुनवाई तक स्थिति पर नजर बनी रहेगी।