उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर से की मुलाकात
India-US Trade Deal (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : फरवरी 2025 से ही भारत और अमेरिका के बीच होने वाले द्विपक्षीय समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। पहले यह समझौता टैरिफ के चलते बाधित हो गया बाद में भारत और अमेरिका के बीच समझौते को लेकर दोनों पक्षों में कुछ बातों को लेकर असहमति बन गई। जिसके बाद दिसंबर में एक बार फिर से ट्रंप ने घोषणा की कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर सहमति बन गई है और जल्द ही दोनों इसपर हस्ताक्षर करेंगे। लेकिन अभी भी यह समझौता अधर में लटका हुआ है।
डब्ल्यूटीओ की बैठक में मिले दोनों प्रतिनिधि
दरअसल कैमरून में विश्व व्यापार संगठन की बैठक के दौरान भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर चर्चा हुई। इस अहम वार्ता ने इस दिशा में रुकी हुई प्रक्रिया को फिर से गति देने का काम किया है। कैमरून के याउंडे में आयोजित डब्ल्यूटीओ के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के मौके पर वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को जैमिसन ग्रीर के साथ बैठक की। इस मुलाकात में दोनों पक्षों ने प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते के अगले चरणों की समीक्षा की और आर्थिक व द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को और गहरा करने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया।
इसलिए हो रही समझौते में देरी
दरअसल, भारत और अमेरिका के बीच पिछले महीने ही पहले चरण के व्यापार समझौते के ढांचे को अंतिम रूप दे दिया गया था, जिस पर इसी महीने हस्ताक्षर होने थे। 2 और 7 फरवरी को हुए एलानों के तहत, अमेरिका भारतीय सामानों पर टैरिफ घटाकर 18% करने पर सहमत हो गया था। लेकिन, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने टैरिफ उपायों को खारिज किए जाने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 24 फरवरी से सभी देशों पर 150 दिनों के लिए 10% का नया वैश्विक टैरिफ लागू कर दिया।
हमने 38 देशों के साथ नौ एफटीए किए
उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने 38 विकसित देशों को शामिल करने वाले नौ क्षेत्रों के साथ नौ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए)किए हैं। उन्होंने कहा कि ये समझौते वैश्विक व्यापार के लगभग दो-तिहाई हिस्से तक तरजीही बाजार पहुंच प्रदान करते हैं और इस बात पर जोर दिया कि भारतीय उद्योग, किसानों, लघु एवं मध्यम उद्यमों और कारीगरों को गुणवत्ता पर मजबूत ध्यान केंद्रित करके इन अवसरों का लाभ उठाना चाहिए।

