हरियाणा के सिरसा जिले से एक चौंकाने वाला और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। डबवाली क्षेत्र के एक किसान ने प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर आरोप लगाते हुए न सिर्फ राष्ट्रपति को इच्छामृत्यु की अनुमति के लिए पत्र लिखा है, बल्कि अब सिरसा के उपायुक्त (DC) को भी इच्छामृत्यु कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बनने का न्योता भेज दिया है। किसान का कहना है कि वह भ्रष्टाचार से इतना टूट चुका है कि अब जीने की इच्छा भी खत्म हो गई है।
यह मामला डबवाली तहसील के कालुआना गांव निवासी किसान ओमप्रकाश से जुड़ा है। ओमप्रकाश ने आरोप लगाया है कि उसकी पारिवारिक जमीन की रजिस्ट्री में नायब तहसीलदार, कानूनगो और पटवारी की मिलीभगत से भारी अनियमितताएं की गईं। किसान का कहना है कि उसके एक भाई ने अपनी जमीन बेची थी, लेकिन जमीन खरीदने वाले व्यक्ति ने गलत तरीके से उसकी जमीन भी रजिस्ट्री में शामिल करवा ली।
ओमप्रकाश के अनुसार, रजिस्ट्री के बाद खरीदार ने जमीन को तीन टुकड़ों में बांट दिया, जिससे उनके खेत तक जाने का रास्ता तक खत्म हो गया। इतना ही नहीं, खेत में पानी पहुंचाने के लिए नाली का भी कोई प्रावधान नहीं छोड़ा गया। किसान का आरोप है कि जब उसने इसका विरोध किया तो उसे बार-बार धमकियां दी गईं और दबाव बनाया गया।
किसान ने बताया कि वह इस मामले को लेकर डबवाली के एसपी से भी मिल चुका है और केस दर्ज करने की मांग की थी, लेकिन कहीं भी उसे न्याय नहीं मिला। इसी से आहत होकर उसने पहले राष्ट्रपति के नाम पत्र लिखकर परिवार सहित इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी, और अब सिरसा में इच्छामृत्यु समारोह आयोजित करने की घोषणा की है, जिसकी तारीख जल्द तय की जाएगी।
डीसी सिरसा के नाम लिखे पत्र में ओमप्रकाश ने खुद को सीनियर सिटिजन और भ्रष्टाचार से पीड़ित नागरिक बताते हुए कहा है कि वह पिछले पांच वर्षों से सरकारी तंत्र की प्रताड़ना झेल रहा है। उसने लिखा कि भ्रष्टाचार से तंग आकर वह इच्छामृत्यु का रास्ता चुनने को मजबूर हो गया है और इसी उपलक्ष्य में इच्छामृत्यु ग्रहण समारोह आयोजित किया जा रहा है, जिसमें डीसी महोदय मुख्य अतिथि बनकर पहुंचें।

अपने पत्र में किसान ने बेहद भावुक शब्दों में लिखा है कि उसके शरीर को अंतिम संस्कार में जलाया न जाए, क्योंकि वह पहले ही भ्रष्टाचार की आग में जलकर राख हो चुका है। उसने यह भी लिखा कि अगर डीसी कार्यक्रम में पहुंचते हैं तो उसका मान बढ़ेगा और वह इसे प्रशासन की कृपा मानेगा।
किसान ने अपने पत्र में एक और दर्दनाक बात लिखी है। उसने कहा है कि वह अपने बेटे से विनती करेगा कि वह अगले जन्म में कभी पुलिस में भर्ती न हो, क्योंकि उसे लगता है कि सिस्टम आम आदमी को न्याय देने में विफल हो चुका है।
ओमप्रकाश ने बताया कि इस मामले में वह 23 फरवरी 2021 को डीसी सिरसा को शिकायत दे चुका है और 30 जून 2021 को चंडीगढ़ में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से भी मुलाकात कर चुका है। इसके बाद सरकार की ओर से जांच करवाई गई थी, जिसमें जमीन खरीदार पर धोखाधड़ी का केस दर्ज करने के आदेश दिए गए थे।
हालांकि, किसान का आरोप है कि नायब तहसीलदार की संलिप्तता के चलते उस आदेश पर अमल नहीं हुआ। बाद में सरकार ने नायब तहसीलदार को निलंबित कर दिया था और कानूनगो व पटवारी के खिलाफ जांच शुरू की गई, लेकिन आज तक उसे अपनी जमीन और रास्ते को लेकर न्याय नहीं मिला।
यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक भ्रष्टाचार के आरोपों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि न्याय की उम्मीद में भटकता एक किसान किस हद तक टूट सकता है।


