बेंगलुरु, 02 अगस्त 2025: कर्नाटक के हासन से पूर्व जद(एस) सांसद प्रज्वल रेवन्ना को बलात्कार और यौन शोषण के एक हाई-प्रोफाइल मामले में बेंगलुरु की विशेष कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। विशेष कोर्ट ने 1 अगस्त 2025 को रेवन्ना को बलात्कार, यौन शोषण, आपराधिक धमकी, और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम के तहत डिजिटल अपराधों का दोषी ठहराया था। शनिवार को कोर्ट ने सजा का ऐलान करते हुए दो मामलों में उम्रकैद और कुल 11 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जो पीड़िता को मुआवजे के रूप में दिया जाएगा। यह सजा तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
मामले का विवरण
यह मामला हासन जिले के होलेनरसीपुरा में रेवन्ना परिवार के गन्निकड़ा फार्महाउस पर काम करने वाली 47 वर्षीय घरेलू सहायिका से संबंधित है। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि प्रज्वल रेवन्ना ने 2021 में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान उसका दो बार बलात्कार किया और अपराध को अपने मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड किया। पीड़िता ने दावा किया कि रेवन्ना ने वीडियो लीक करने की धमकी देकर उसे चुप रहने के लिए मजबूर किया। 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सैकड़ों अश्लील वीडियो के पेन ड्राइव हासन में प्रसारित होने के बाद यह मामला सामने आया।
जांच और साक्ष्य
विशेष जांच दल (SIT) ने इस मामले की जांच की और सितंबर 2024 में 1,632 पेज का आरोप पत्र दाखिल किया, जिसमें 113 गवाहों के बयान और 180 दस्तावेज शामिल थे। जांच में पीड़िता के कपड़ों पर रेवन्ना के डीएनए, फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट, और रिकॉर्ड किए गए वीडियो महत्वपूर्ण साक्ष्य बने। SIT ने यह भी पुष्टि की कि रेवन्ना ने पीड़िता के साथ हासन और बेंगलुरु में उनके परिवार के आवास पर बलात्कार किया। प्रज्वल के पूर्व ड्राइवर कार्तिक एन ने 2,000 से अधिक अश्लील चित्रों और 40-50 वीडियो की खोज की थी, जिसने इस मामले को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कोर्ट की कार्रवाई
बेंगलुरु की विशेष कोर्ट, जो पूर्व और वर्तमान सांसदों/विधायकों के आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए गठित है, ने इस मामले की सुनवाई 2 मई 2025 को शुरू की। जज संतोष गजानन भट ने 38 सुनवाइयों में 26 गवाहों की जांच और 180 दस्तावेजों की समीक्षा के बाद 18 जुलाई को सुनवाई पूरी की। 1 अगस्त को रेवन्ना को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(k) (प्रभुत्व की स्थिति में बलात्कार), 376(2)(n) (एक ही महिला के साथ बार-बार बलात्कार), 354(B) (महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से आपराधिक बल), 354(C) (दृश्यरति), 506 (आपराधिक धमकी), और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66E (निजता का उल्लंघन) के तहत दोषी ठहराया गया।
शनिवार को सजा सुनाते हुए कोर्ट ने IPC धारा 376(2)(k) और 376(2)(n) के तहत आजीवन कारावास और प्रत्येक में 5 लाख रुपये का जुर्माना, साथ ही अन्य धाराओं के तहत 1 लाख रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया। कुल 11 लाख रुपये का जुर्माना पीड़िता को मुआवजे के रूप में दिया जाएगा। विशेष लोक अभियोजक (SPP) अशोक नायक और बी.एन. जगदीश ने कठोर सजा की मांग की थी, ताकि समाज में एक मजबूत संदेश जाए।
रेवन्ना का बयान
सजा की सुनवाई के दौरान प्रज्वल रेवन्ना कोर्ट में भावुक हो गए और रो पड़े। उन्होंने दावा किया कि यह मामला राजनीति से प्रेरित था और 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उनके खिलाफ साजिश रची गई। रेवन्ना ने कहा, “मैंने तेजी से राजनीति में ऊंचाइयां हासिल कीं, यही मेरी गलती थी। जब मैं सांसद था, तब कोई शिकायत नहीं आई। यह मामला केवल चुनाव के समय क्यों सामने आया?” उन्होंने यह भी कहा कि वह एक मैकेनिकल इंजीनियरिंग स्नातक हैं और हमेशा मेरिट पर पास हुए हैं। हालांकि, कोर्ट ने उनके तर्कों को खारिज कर दिया।
पृष्ठभूमि और अन्य मामले
प्रज्वल रेवन्ना, पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के पोते, पूर्व कर्नाटक मंत्री एच.डी. रेवन्ना के बेटे, और केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के भतीजे हैं। वह 2024 के लोकसभा चुनाव में जद(एस)-भाजपा गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में हासन से हार गए थे। अप्रैल 2024 में अश्लील वीडियो सामने आने के बाद रेवन्ना जर्मनी भाग गए थे, लेकिन 31 मई 2024 को बेंगलुरु हवाई अड्डे पर उनकी गिरफ्तारी हुई। वह तब से परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में बंद हैं। रेवन्ना के खिलाफ चार यौन शोषण और बलात्कार के मामले दर्ज हैं, जिनमें से यह पहला मामला है जिसमें सजा सुनाई गई है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
रेवन्ना के परिवार ने इन मामलों को राजनीति से प्रेरित बताया और दावा किया कि कर्नाटक की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार ने हासन में जद(एस) के प्रभाव को कम करने के लिए साजिश रची। हालांकि, कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खड़गे ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और कहा कि यह दर्शाता है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने भाजपा और जद(एस) की चुप्पी पर सवाल उठाए।
प्रज्वल रेवन्ना को मिली आजीवन कारावास की सजा और 11 लाख रुपये का मुआवजा पीड़िता के लिए न्याय का एक महत्वपूर्ण कदम है। यह मामला न केवल कर्नाटक बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि यह एक प्रभावशाली राजनेता के खिलाफ कठोर कार्रवाई को दर्शाता है। रेवन्ना के खिलाफ बाकी तीन मामलों की सुनवाई जारी है, और यह देखना बाकी है कि उनमें भी सजा का क्या परिणाम होगा।