15 अप्रैल को वाणिज्य मंत्रालय आधिकारिक रूप से जारी करेगा अंतिम आंकड़े
Business News Hindi (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत का कुल वस्तु और सेवा निर्यात 5-6 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कुल निर्यात 825 बिलियन अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया था, जिसमें 437 बिलियन डॉलर का वस्तु निर्यात और 388 बिलियन डॉलर का सेवा निर्यात शामिल था। वाणिज्य मंत्रालय की ओर से 15 अप्रैल को निर्यात के अंतिम आंकड़े आधिकारिक रूप से जारी किए जाएंगे। फेडरेशन आॅफ इंडियन एक्सपोर्ट आॅगेर्नाइजेशंस (फियो) ने उम्मीद जताई है कि इसमें तेजी दर्ज की जाएगी।
वस्तु निर्यात में गिरावट की आंशका
हालांकि फियो ने यह भी आशंका जताई है कि पश्चिमी एशिया तनाव के बीच दुनिया की आपूर्ति शृंखला बुरी तरह प्रभावित है। इस कारण वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश के वस्तु निर्यात में 2-3 प्रतिशत की गिरावट आने की आशंका है। फेडरेशन आॅफ इंडियन एक्सपोर्ट आॅगेर्नाइजेशंस ने भी इस बारे में चिंता जाहिर की है। संस्था के अध्यक्ष एससी रल्हन ने कहा है कि इस संकट के चलते पिछले वित्त वर्ष के मार्च महीने में ही देश के निर्यात शिपमेंट में 7-8 प्रतिशत की कमी आ सकती है।
इसलिए कम हो सकता है निर्यात
निर्यात घटने का प्रमुख कारण 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इस्राइल की ओर से किया गया संयुक्त हमला है। इस लड़ाई ने पश्चिम एशिया में भारत के निर्यात पर बहुत बुरा असर डाला। इस तनाव के बाद भारत के लिए शिपिंग भाड़ा, हवाई परिवहन कार खर्च और बीमा लागत बहुत तेजी से बढ़े। पश्चिम एशिया के देशों से तेल और गैस की आवाजाही में भी रुकावट आई जिसके करण स्टील, प्लास्टिक और रबर जैसे कच्चे माल की कीमतें आसमान चढ़ गईं। ताजे फल और सब्जियों एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए हवाई और समुद्री भाड़े की लागत अचानक बढ़ गईं।
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