केंद्र सरकार ने 25 लाख टन गेहूं, पांच लाख टन चीनी को होगा निर्यात
Business News (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : आने वाले रबी सीजन की तैयारी केंद्र सरकार ने शुरू कर दी है। इससे केंद्र को दो फायदे होंगे। एक तो आने वाले सीजन के लिए सरकार के गोदामों में जगह खाली हो जाएगी दूसरा सरकार को मोटा राजस्व भी मिल जाएगा। जाकि अर्थव्यवस्था के विकास में लाभकारी साबित होगा। दरअसल भारत में इतना ज्यादा अनाज उत्पादन हो रहा है कि सरकार के पास उसे स्टॉक करने की जगह तक नहीं बची।
इसी के चलते केंद्र सरकार ने 25 लाख टन गेहूं और पांच लाख टन चीनी को अंतरराष्टÑीय बाजार में बेचने का निर्णय लिया है। इस फैसले का सीधा मकसद घरेलू कीमतों में स्थिरता लाना और रबी सीजन की नई फसल आने से पहले किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाना है। खाद्य मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, गेहूं के अलावा 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की भी अनुमति दी गई है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब निजी और सरकारी, दोनों ही स्तरों पर देश में अनाज का भंडार आरामदायक स्थिति में है।
चीनी मिलों को नई राहत
गेहूं के साथ-साथ सरकार ने चीनी उद्योग को भी राहत दी है। चीनी सत्र 2025-26 के लिए ‘इच्छुक’ चीनी मिलों को अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी निर्यात करने की अनुमति दी गई है। इससे पहले 14 नवंबर, 2025 को सरकार ने 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी। हालांकि, मिलों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 31 जनवरी, 2026 तक केवल 1.97 लाख टन चीनी का ही निर्यात हो पाया है, जबकि लगभग 2.72 लाख टन के सौदे अनुबंधित हो चुके हैं।
सरकार ने रखी यह शर्त
अतिरिक्त पांच लाख टन का कोटा केवल उन मिलों को दिया जाएगा जो इसके लिए इच्छा जताएंगे। शर्त यह है कि आवंटित कोटे का कम से कम 70% हिस्सा 30 जून, 2026 तक निर्यात करना अनिवार्य होगा। आवंटन प्रो-राटा (अनुपातिक) आधार पर होगा और मिलों को आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर अपनी सहमति देनी होगी। सबसे अहम बात यह है कि इस निर्यात कोटे को किसी दूसरी मिल के साथ बदला नहीं जा सकेगा। सरकार का यह कदम बाजार में लिक्विडिटी (तरलता) सुधारने और पीक सीजन में ‘डिस्ट्रेस सेल’ (औने-पौने दाम पर बिक्री) को रोकने के लिए उठाया गया है। निर्यात खुलने से घरेलू बाजार में कीमतों को सपोर्ट मिलेगा, जिससे किसानों की आय सुरक्षित रहेगी।

