कहा, अमेरिका के साथ द्विपक्षीय समझौते में न तो कृषि और न ही ऊर्जा क्षेत्र की अनदेखी की
Business News Hindi (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : भारत और अमेरिका के बीच होने जा रहे द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बोलते हुए भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यह स्पष्ट किया है कि इस समझौते में देश के किसी भी वर्ग के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा और उसपर किसी तरह की आंच नहीं आने दी जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने देश की विपक्षी पार्टियों पर आरोप लगाया कि वे गलत जानकारी जनता के सामने पेश कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच 45 लाख करोड़ रुपए की व्यापारिक डील ऐतिहासिक है। जहां एक ओर विपक्ष इस समझौते को किसानों के लिए नुकसानदेह बता रहा है, वहीं सरकार ने दो टूक कहा है कि न तो कृषि क्षेत्र के हितों से समझौता किया गया है और न ही देश की ऊर्जा सुरक्षा पर कोई आंच आने दी जाएगी। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के बाद विदेश मंत्रालय और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अलग-अलग बयानों में सरकार की स्थिति साफ की है। वैश्विक अनिश्चितताओं और बदलती अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता के बीच, मंत्रालय ने कहा है कि 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अपनी जरुरतों के लिए भारत एक देश पर निर्भर नहीं रहेगा
एमईए ने अपने बयान में कहा, “बाजार की वस्तुनिष्ठ स्थितियों और विकसित होती अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता को ध्यान में रखते हुए हमारे ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी रणनीति के मूल में है”। इसका सीधा अर्थ है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहेगा और जहां भी देशहित में बेहतर विकल्प मिलेगा, वहां से ऊर्जा संसाधन खरीदेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा व्यापार के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
किसानों का हित पूरी तरह सुरक्षित
शिवराज सिंह चौहान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को विपक्ष के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा जा रहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारतीय किसानों को बर्बाद कर देगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समझौते के तहत भारतीय किसानों के हितों को पूरी तरह से सुरक्षित रखा गया है। चौहान का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि व्यापार वार्ता में अक्सर अमेरिका की ओर से डेयरी और अनाज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बाजार पहुंच की मांग की जाती रही है। कृषि मंत्री के बयान से यह संकेत मिलता है कि भारत ने अपनी ‘रेड लाइन्स’ नहीं लांघी हैं। सरकार का यह स्पष्टीकरण उन चिंताओं को दूर करने की कोशिश है कि अमेरिकी कृषि उत्पादों की डंपिंग से भारतीय किसानों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
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