Editorial Aaj Samaaj | राजीव रंजन तिवारी | भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि उसके खिलाफ लड़ाई अब आसान नहीं रही। भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने वालों का जो हश्र होता है, वह बेहद चिंताजनक है। अब आप दुनिया के विकसित देशों की मिसाल भी नहीं दे सकते कि वहां भ्रष्टाचार कम है। दुनिया के अनेक देश लगातार भ्रष्टाचार के चंगुल फंसते जा रहे हैं। डीडब्ल्यू की एक रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के बड़े-बड़े लोकतंत्रिक देश भी धीरे-धीरे भ्रष्टाचार के सामने घुटने टेक रहे हैं। यह देश और समाज के लिए चिंताजनक है। यदि इसी तरह से हालात बदलते रहे तो वह दिन दूर नहीं, जब आम आदमी का जीना मुहाल हो जाएगा। अमेरिका और स्वीडन जैसे देश जो कभी भ्रष्टाचार से लड़ने में आदर्श माने जाते थे। अब वहां भी तेजी से भ्रष्टाचार बढ़ रहा है।

पिछले दिनों जारी हुए ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के 2025 के करप्शन परसेप्शन इंडेक्स (सीपीआई) में पश्चिमी देशों में भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए नेतृत्व की कमी सामने आई है। सीपीआई की 31वीं रिपोर्ट में 180 से ज्यादा देशों और क्षेत्रों को पब्लिक सेक्टर में भ्रष्टाचार के आधार पर रैंक किया गया है। रिपोर्ट में अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और स्वीडन जैसे देशों के स्कोर में गिरावट दर्ज की गई है। 80 से ज्यादा स्कोर पाने वाले देशों की संख्या पिछले 10 वर्षों में 12 से घटकर सिर्फ पांच रह गए हैं। डेनमार्क ने लगातार आठवीं बार सबसे ज्यादा 89 अंक हासिल किए हैं। उसके बाद फिनलैंड (88) और सिंगापुर (84) रहे। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के प्रमुख फ्रांसुआ वैलेरियन का कहना है कि कई सरकारें अब भ्रष्टाचार से लड़ना अपनी प्राथमिकता नहीं मानती। सरकारों को यह लगने लगा है कि उन्होंने भ्रष्टाचार से निपटने के लिए काफी कुछ कर लिया है।
आपको बता दें कि सीपीआई हर देश को 0 से 100 के पैमाने पर रैंक करता है। इसके अनुसार 0 का मतलब बहुत ज्यादा भ्रष्टाचार और 100 का मतलब साफ छवि वाला देश है। इस पैमाने के अनुसार अमेरिका का स्कोर गिरकर 64 पर पहुंच गया है, जो कि अब तक का उनका सबसे कम स्कोर है। साल 2016 के मुकाबले देखे तो यह तब से दस अंक नीचे गिर चुका है। अमेरिका का राजनीतिक माहौल पिछले एक दशक से तेजी से बिगड़ा है। हालिया आंकड़े पूरी तरह उस बदलाव को नहीं दिखाते, जो पिछले साल ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद हुए हैं।
बाइडेन सरकार के दौरान अमेरिका की रैंकिंग स्थिर थी। लेकिन पिछले साल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से जुड़े बड़े नैतिक घोटालों को स्कोर गिरने की बड़ी वजह बताया गया। वैलेरियन कहते हैं कि हर चीज के लिए ट्रंप दोषी नहीं हैं, क्योंकि कुछ चिंताजनक चीजें उनके आने से पहले ही शुरू हो चुके थे। अमेरिका में भी सरकारी पद का इस्तेमाल स्वतंत्र आवाजों को दबाने के लिए करना, स्वार्थ और लेन-देन वाली राजनीति को सामान्य बनाना, प्रॉसिक्यूशन फैसलों का राजनीतिकरण करना और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर करने वाला कदम उठाया जा रहा है।
ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से कई ऐसे कदम उठाए हैं, जिसके लिए ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने चेतावनी दी है। इसके तहत वॉइस ऑफ अमेरिका जैसे सरकारी प्रसारकों को खत्म किया गया और सरकारी एजेंसियों का राजनीतिक विरोधियों जैसे बाइडेन प्रशासन और अन्य शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ इस्तेमाल किया गया है। काफी पहले वैलेरियन ने ट्रंप की आलोचना करते हुए कहा था कि उन्होंने कार्यकारी आदेश के जरिए एफसीपीए में बदलाव कर उसे राष्ट्रीय सुरक्षा के औजार में बदल दिया।
उन्होंने ट्रंप के क्रिप्टोकरेंसी (जैसे बिटकॉइन) के समर्थन की भी आलोचना की थी, जिसका इस्तेमाल अक्सर मनी लॉन्ड्रिंग में किया जाता है। उन्होंने अमीर विदेशियों के लिए तेजी से नागरिकता/वीजा देने की योजना की भी आलोचना की थी। वैलेरियन कहते हैं कि ऐसे वीजा कार्यक्रम भ्रष्ट लोगों और अपराधियों को आकर्षित कर सकते हैं। पिछले 10 वर्षों में पश्चिमी देशों में भ्रष्टाचार की धारणा सबसे ज्यादा ब्रिटेन में गिरी है। ब्रिटेन का स्कोर 11 अंक गिरकर 70 पर पहुंच गया है। इसकी वजह मंत्रियों, सांसदों और सरकारी अधिकारियों के लिए नैतिक नियमों को ठीक से लागू न कर पाना है।
रिपोर्ट में कोविड-19 के दौरान घोटालों का भी जिक्र है, जब सत्ता के करीबी लोगों को बिना पर्याप्त जांच के पीपीई (मास्क, मेडिकल सामान) सप्लाई करने के ठेके मिले थे। कई अन्य देशों में भी गिरावट देखी गई है। जैसे न्यूजीलैंड 9 अंक गिरकर 81, स्वीडन 8 अंक गिरकर 80, कनाडा 7 अंक गिरकर 75 पर आ गए हैं। साथ ही, जर्मनी पिछले 10 साल में 4 अंक गिरकर 77 पर आ गया है। हालांकि, यह आंकड़ा पिछले साल से दो अंक बढ़ा है। इस इंडेक्स के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में फ्रांस का स्कोर चार अंक गिरकर 66 हो गया है।
हालांकि रिपोर्ट ने पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति, निकोला सारकोजी की सजा को एक सकारात्मक कदम बताया। लेकिन सरकोजी को अवैध फंड लेने का दोषी ठहराया गया था, जिसमें लीबिया के पूर्व नेता मुआम्मर गद्दाफी से मिला पैसा भी शामिल था, जिसे राष्ट्रपति चुनाव के अभियान में इस्तेमाल किया गया था। वैलेरियन कहते हैं कि कई यूरोपीय देश भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में आगे थे। लेकिन अब यूरोपीय संघ ने अपने भ्रष्टाचार विरोधी कानून को कमजोर कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2012 के बाद से 50 देशों की रैंकिंग में बड़ी गिरावट आई है। खास तौर पर तुर्की, हंगरी और निकारागुआ में भारी गिरावट है।
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने चेतावनी दी है कि भ्रष्टाचार अब संगठित अपराध (माफिया/ड्रग कार्टेल) को लैटिन अमेरिका की राजनीति में घुसने का मौका दे रहा है। यहां तक कि कोस्टा रिका और उरुग्वे, जिन्हें पहले क्षेत्र के सबसे मजबूत लोकतंत्र माना जाता था। वह अब कोलंबिया, मेक्सिको और ब्राजील जैसे देशों की तरह भ्रष्टाचार का सामना कर रहे हैं। वैलेरियन ने कहा कि सत्ता जितनी ज्यादा कुछ लोगों के हाथ में केंद्रित होती है, उतना ही सत्ता का दुरुपयोग बढ़ता है और जितनी ज्यादा सत्ता गोपनीय होती है, उसका दुरुपयोग करना उतना ही आसान हो जाता है।
रिपोर्ट में जेफ्री एप्सटीन की हाल ही में जारी फाइल्स शामिल नहीं हैं, जो पिछले महीने ही सामने आई थी। इन फाइल्स में कई देशों के अधिकारियों पर गलत काम, भ्रष्टाचार या दोषी यौन अपराधी जेफ्री एप्सटीन से संदिग्ध संबंधों के आरोप लगे हैं। संस्था ने चिंता जताई है कि कई देशों में सरकारें गैर-सरकारी संगठनों के काम में राजनीतिक हस्तक्षेप कर रही हैं, खासकर उन संगठनों के खिलाफ जो सरकार की आलोचना करते हैं। जॉर्जिया, इंडोनेशिया और पेरू में ऐसे संगठनों पर कार्रवाई और फंडिंग कटौती बढ़ी है। रिपोर्ट में यूक्रेन की भ्रष्टाचार विरोधी कोशिशों की भी तारीफ की गई है। हाल में रक्षा क्षेत्र में सामने आए घोटाले ने उजागर किया है कि भ्रष्टाचार भी एक समस्या है।
रिपोर्ट में कहा गया कि इन मामलों का सार्वजनिक रूप से सामने आना और अदालत में उजागर होना दिखाता है कि यूक्रेन का नया भ्रष्टाचार विरोधी सिस्टम सुचारू तरीके से काम कर रहा है। वैलेरियन ने कहा कि एक देश यानी यूक्रेन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने का फैसला किया, जबकि रूस ने इसके उलट रास्ता चुना है। उन्होंने बताया कि रूस ने भ्रष्टाचार रोकने और सजा देने वाले कई कानून खत्म कर दिए हैं। करप्शन परसेप्शन इंडेक्स में रूस का स्कोर 22 है और वह नीचे के देशों में बना हुआ है। जबकि, यूक्रेन का स्कोर 36 है, जो पिछले 10 सालों में सात अंक बढ़ा है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, तानाशाही वाले देशों जैसे वेनेजुएला और अजरबैजान में भ्रष्टाचार सबसे ज्यादा है, क्योंकि वहां हर स्तर पर भ्रष्टाचार फैला हुआ है।
नए भ्रष्टाचार इंडेक्स में दुनिया के दो-तिहाई से ज्यादा देशों का स्कोर 50 से नीचे रहा है। इसका मतलब है कि दुनिया के अधिकांश हिस्सों में भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या है। रिपोर्ट में कहा गया कि जिन देशों का स्कोर 25 से कम है। वह आमतौर पर युद्ध, हिंसा या सख्त दमनकारी शासन से प्रभावित हैं। इसमें 13 अंक के साथ लीबिया, यमन, इरिट्रिया देश हैं। साथ ही, सोमालिया और साउथ सूडान जैसे देश 9 अंक के साथ शामिल हैं। हालांकि, रिपोर्ट में कुछ सकारात्मक बातें भी कही गई हैं। कुछ देश जैसे अल्बानिया, अंगोला, द आइवरी कोस्ट, लाओस, सेनेगल, यूक्रेन और उज्बेकिस्तान ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया है। इसके अलावा, उच्च अंक पाने वाले एस्टोनिया, दक्षिण कोरिया, भूटान और सेशेल्स जैसे देशों ने लंबे समय में अच्छा प्रदर्शन किया है। (लेखक द भारत ख़बर के संपादक हैं।)
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