हरियाणा को यमुना नदी के पुनरुद्धार को लेकर केंद्र सरकार से बड़ा झटका लगा है। केंद्र ने पर्यावरणीय प्रवाह यानी ई-फ्लो बढ़ाने के निर्देश जारी करते हुए हरियाणा सरकार को मुनक नहर से प्रतिदिन 100 क्यूसेक पानी सीधे यमुना नदी में छोड़ने को कहा है। इस फैसले के बाद राज्य के जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।
दरअसल, हाल ही में यमुना नदी की बिगड़ती स्थिति को लेकर हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली को स्पष्ट निर्देश दिए गए। बैठक में नदी में न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह सुनिश्चित करने, नालों से हो रहे प्रदूषण पर नियंत्रण और औद्योगिक अपशिष्ट के प्रवाह को रोकने पर सहमति बनी। इसके साथ ही यमुना में गिरने वाली सभी नालियों के ऑडिट के लिए एक तृतीय-पक्ष एजेंसी नियुक्त करने का भी फैसला लिया गया है।
इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश को ऊपरी गंगा नहर से करीब 800 क्यूसेक पानी को सीधे वजीराबाद बैराज की ओर मोड़ना होगा, ताकि दिल्ली तक यमुना में पानी की मात्रा बनी रहे। वहीं हरियाणा को मुनक नहर से 100 क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक पर्यावरणीय प्रवाह वह न्यूनतम जल मात्रा होती है, जो नदी के पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता को बनाए रखने के लिए आवश्यक मानी जाती है।
केंद्र सरकार ने हरियाणा को यह भी निर्देश दिए हैं कि राज्य में यमुना में गिरने वाली सभी नालियों को तय मानकों के अनुसार नियंत्रित किया जाए और इसके लिए 2026 तक की समय-सीमा तय की गई है। औद्योगिक प्रदूषण को कम करने के लिए अधिक संख्या में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) स्थापित करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। इसके अलावा हथनीकुंड बैराज से नदी में पानी की तीसरी धारा विकसित करने की योजना बनाई गई है, जिससे गाद और कचरे के जमाव को कम किया जा सके।
यमुना के पर्यावरणीय प्रवाह की निगरानी के लिए केंद्र सरकार पहली बार अत्याधुनिक रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने जा रही है। नमामि गंगे मिशन के तहत हरियाणा के हथनीकुंड बैराज और दिल्ली के ओखला बैराज के पास दो आधुनिक निगरानी स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इस परियोजना के लिए केंद्र ने 1.56 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है, जिससे यमुना में पानी की गुणवत्ता और प्रवाह पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।
इस बीच हरियाणा के सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने कच्चे पानी की आपूर्ति में कटौती कर दी है, जिसका सीधा असर दिल्ली की जल आपूर्ति पर पड़ा है। विभाग ने दिल्ली जल बोर्ड को सूचित किया है कि 20 जनवरी से 4 फरवरी तक पैरलल दिल्ली ब्रांच में तकनीकी कार्यों के चलते जल आपूर्ति प्रभावित रहेगी। वजीराबाद बैराज में अमोनिया का स्तर बढ़ने के कारण पहले से ही नई दिल्ली समेत लगभग 30 प्रतिशत इलाकों में पेयजल संकट गहराया हुआ है।
कुल मिलाकर यमुना के पुनरुद्धार के लिए केंद्र सरकार के सख्त कदमों ने हरियाणा के सामने जल प्रबंधन की नई चुनौती खड़ी कर दी है, जिसका असर आने वाले दिनों में सिंचाई और शहरी जल आपूर्ति दोनों पर देखने को मिल सकता है।

