केडी का संगीत एक अद्वितीय संमिश्रण है जो पारंपरिक हरियाणवी तत्वों को समकालीन हिप-हॉप की लय के साथ जोड़ता है।उनके गीतों में ग्रामीण जीवन, सामाजिक समस्याओं, व्यक्तिगत अनुभवों और हरियाणा की संस्कृति की झलकियां मिलती हैं। वे केवल गायन नहीं करते, बल्कि प्रत्येक गीत में एक कहानी बुनते हैं जो श्रोताओं के दिल को छू जाती है।
2015-2017 के दौरान, केडी ने एमडी (मनोज धवन) के साथ एक सफल सहयोग शुरू किया। यह जोड़ी हरियाणवी संगीत दृश्य में विस्फोटक बन गई। उनके गीतों में “बूम बास”, “पिनएप्पल मनी” जैसे ट्रैक बेहद लोकप्रिय रहे। इस सहयोग ने केडी को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। दोनों कलाकारों ने बॉलीवुड फिल्मों में भी अपने गीत दिए।
2018 में केडी का एल्बम “देसी देसी ना बोल्या कर” जारी हुआ, जो एक बड़ी सफलता बन गया। इस एल्बम का शीर्षक गीत “देसी देसी ना बोल्या कर” हरियाणा में एक सांस्कृतिक घटना बन गई। इस गीत में केडी ने पारंपरिक हरियाणवी संस्कृति का बचाव करते हुए युवाओं से अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व करने का आह्वान किया। गीत की पंक्तियां:
“देसी देसी ना बोल्या कर छोरी रे, इस देसी की फैन या दुनिया हो रही रे।”
केडी की कविता और संगीत रचना की शक्ति यह है कि वे जटिल भावनाओं को सरल, आकर्षक लय में व्यक्त करते हैं। उनके गीतों में आत्मसम्मान, देश प्रेम, सामाजिक मुद्दों पर गहरी टिप्पणियां होती हैं। उदाहरण के लिए, उन्होंने सफलता, शिक्षा, और युवा बेरोजगारी जैसे विषयों पर कई प्रेरणादायक गीत लिखे हैं।
