अगले वित्त वर्ष के दौरान भारतीय जीडीपी वृद्धि दर 6.8 से 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान
India GDP (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : वर्ष 2025 में भारत ने अपनी वित्तीय नीतियों के चलते विश्व के बहुत सारे देशों को आईना दिखाया। एक तरफ जहां विश्व के सभी प्रमुख देश वैश्विक व्यापार समस्या और अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव से जूझ रहे थे वहीं भारत की अर्थव्यवस्था ने शानदार गति के साथ विकास किया।
लेकिन अब यह गुजरे समय की बात हो चुकी है। वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान भारत के सामने नई चुनौतियां हैं। जिनसे भारत पार पाना चाहेगा। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मध्यम अवधि के अनुमान सकारात्मक दिखाई दे रहे हैं। हालिया ईवाई इकोनॉमी वॉच रिपोर्ट के अनुसार, अगले वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है।
इसलिए जरूरी हैं आर्थिक सुधार
इसके साथ ही, रिपोर्ट में साफ किया गया है कि विकसित भारत 2047 के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को अपने टैक्स-जीडीपी अनुपात में वृद्धि करनी होगी, जो मुख्य रूप से कर अनुपालन में सुधार के जरिए ही संभव है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और बड़े आर्थिक समूहों के साथ भारत के व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के कारण मध्यम अवधि में देश की आर्थिक संभावनाएं काफी उज्ज्वल हुई हैं।
टैक्स सुधार और निजी उपभोग मांग पर असर
चालू वित्त वर्ष में सरकार द्वारा किए गए प्रमुख टैक्स सुधारों का सीधा असर आम आदमी की जेब और देश की खपत पर पड़ा है। वर्तमान वित्त वर्ष में प्रमुख कर सुधार लागू किए गए हैं, जो विशेष रूप से व्यक्तिगत आयकर और वस्तु व सेवा कर से संबंधित हैं। इन सुधारों का मुख्य लक्ष्य परिवारों की डिस्पोजेबल इनकम (खर्च योग्य आय) में वृद्धि करना था। आय बढ़ने से बाजार में निजी उपभोग की मांग को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
टैक्स दरों में किए गए इन सुधारों के कारण सरकार को अपने राजस्व में एक बड़े हिस्से का त्याग करना पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, इन कर सुधारों में भारत सरकार के सकल कर राजस्व का काफी बलिदान शामिल था। इन छूटों के चलते यह आशंका भी जताई गई है कि सकल कर राजस्व वित्त वर्ष 2026 के बजट अनुमानों से कम रह सकता है।
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