आईओसी ने रूसी तेल की भरपाई के लिए ब्राजील सहित अन्य देशों से खरीदा 70 लाख बैरल तेल
Crude Oil Import (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : अमेरिका के दबाव के बाद भारत ने कच्चे तेल के आयात में अपनी रणनीति में बदलाव किया है। ताजा आकड़ों की बात करें तो देश की प्रमुख सरकारी कंपनियां अब रूस से न के बराबर कच्चा तेल खरीद रही हैं। रूस से तेल खरीद न होने की भरपाई ब्राजील सहित अन्य देशों से तेल आयात करके पूरी की जा रही है। ऐसे ही आंकड़ें देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने जारी किए है।
इनमें कंपनी ने रूसी तेल में कटौती की भरपाई के लिए ब्राजील की पेट्रोब्रास समेत कई अन्य देशों से 70 लाख बैरल तेल खरीदा है। घरेलू रिफाइनरियां अपने शीर्ष आपूर्तिकर्ता रूस से दूरी बनाने और मध्य पूर्व से आयात बढ़ाने के लिए रणनीतियों में बदलाव कर रही हैं। यह कदम भारत को अमेरिका के साथ टैरिफ कम करने के लिए व्यापार समझौता करने में मदद कर सकता है।
यहां से भी खरीद रही क्रूड ऑयल
सूत्रों के अनुसार, आईओसी ने शेल से अबू धाबी के मुरबान ग्रेड का 10 लाख बैरल और व्यापारी मर्कुरिया से अपर जाकुम ग्रेड का 20 लाख बैरल खरीदा है। एक्सॉन से अंगोला के हंगो और क्लोव ग्रेड का 10 लाख बैरल भी खरीदा है। आईओसी ने वैकल्पिक अनुबंध के तहत पेट्रोब्रास से ब्राजील के बुजियोस तेल के 20 लाख बैरल भी खरीदे हैं, जो पारस्परिक रूप से सहमत शर्तों पर सौदा करने की सुविधा प्रदान करता है।
तेल आयात मूल्य का आंकड़ा शेयर नहीं किया
गोपनीयता समझौतों के कारण तेल खरीदी के कुल मूल्य का आंकड़ा कंपनियों ने नहीं दिया है। आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में भारत का रूसी तेल आयात दो वर्षों में सबसे निचले स्तर पर आ गया। दूसरी ओर, ओपेक देशों से आयात का हिस्सा 11 महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गया। 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत रियायती रूसी समुद्री कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा, आईओसी ने पिछले माह कोलंबिया की सरकारी तेल कंपनी इकोपेट्रोल से वैकल्पिक आपूर्ति समझौते के तहत पहला कोलंबियाई तेल खरीदा। इक्वाडोर के ओरिएंट क्रूड की भी पहली बार खरीदी की थी।

