
जहाजों को होर्मुज से नहीं गुजरना होगा
LPG Crisis, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: इंडियन आॅयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और गेल जैसी कंपनियां अफ्रीकी देश अंगोला की सरकारी कंपनी सोनानगोल से एलपीजी खरीदने पर बातचीत कर रही हैं। बातचीत अभी शुरूआती दौर में है और सरकार स्तर पर भी चर्चा चल रही है। दरअसल, भारत की 92% एलपीजी खाड़ी देशों से आती है।
ईरान जंग की वजह से भारत में आई गैस की कमी से निपटने के लिए सरकारी तेल और गैस कंपनियां अब नए देशों से रसोई गैस खरीदने का आॅप्शन तलाश रही है। भारत सरकार इस निर्भरता को घटाना चाहती है। ऐसे में अगर अंगोला से करार हो जाता है तो जहाज अटलांटिक और अरब सागर से होते हुए सीधे भारत पहुंचेंगे। उन्हें होर्मुज स्ट्रेट से नहीं गुजरना होगा।
अमेरिका की तुलना में 10 से 15 दिन जल्दी भारत पहुंच सकती है गैस
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अफ्रीका से गैस सप्लाई अमेरिका की तुलना में 10 से 15 दिन जल्दी भारत पहुंच सकती है। ऐसे में अंगोला भारत के लिए एक अच्छा आॅप्शन बन सकता है। अगर यह करार होता है, तो अंगोला पहली बार भारत को रसोई गैस सप्लाई करेगा।
भारतीय कंपनियां एलपीजी के लिए करीब एक साल और एलपीजी के लिए कम से कम 10 साल का करार करने पर विचार कर रही हैं। अंगोला के पास करीब 4.6 ट्रिलियन क्यूबिक फीट नेचुरल गैस का भंडार है और वह पहले से ही भारत को कच्चा तेल और एलपीजी सप्लाई करता रहा है। वित्त वर्ष 2025 में अंगोला भारत का पांचवां सबसे बड़ा एलपीजी सप्लायर था।
आॅस्ट्रेलिया-अल्जीरिया और रूस से भी एलपीजी खरीदने की तैयारी
भारत सिर्फ अंगोला ही नहीं, बल्कि आॅस्ट्रेलिया, अल्जीरिया और रूस जैसे देशों से भी गैस इम्पोर्ट के आॅप्शन तलाश रहा है, ताकि किसी एक रीजन पर निर्भरता कम की जा सके। इस गैस संकट का असर उर्वरक (फर्टिलाइजर) और स्टील सेक्टर जैसे उद्योगों पर भी पड़ सकता है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो गैस की कीमतें भी बढ़ सकती हैं और भारत को महंगे दामों पर गैस -खरीदनी पड़ सकती है।
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