टैरिफ और वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद इसमें शानदार वृद्ध
Indian exports (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : पिछले एक साल से पूरी दुनिया टैरिफ और वैश्विक व्यापार के प्रतिकूल दौर से जूझ रही है। हालांकि भारत के लिए स्थिति ऐसी नहीं रही। इस अवधि के दौरान भारत पर अमेरिका द्वारा 50 प्रतिशत का उच्च टैरिफ लगाया गया लेकिन भारत ने तुंरत नई योजना बनाकर इसका जवाब तलाश लिया।
इतना ही नहीं भारत ने अमेरिका से निर्यात कम होने की भरपाई करते हुए बिना समय गवाए नए विदेशी बाजार तलाश लिए। इसका असर यह हुआ की भारत का अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच देश का कुल निर्यात 720.76 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले साल इसी अवधि के 679.02 अरब डॉलर से 6.15% ज्यादा है। यह जानकारी व्यापार मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट में सामने आई है।
चुनौतीपूर्ण समय में हासिल की वृद्धि
यह वृद्धि ऐसे समय में आई है जब वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य आर्थिक नीति की अनिश्चितताओं और बदलती आपूर्ति शृंखलाओं के कारण चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। भारतीय व्यापार डेटा स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है कि देश इन जटिलताओं के बीच भी अपनी क्षमता का प्रभावी ढंग से उपयोग कर रहा है। यह वृद्धि माल और सेवाओं दोनों के निर्यात में देखी गई ताकत का परिणाम है। रिपोर्टे के अनुसार सेवा निर्यात विकास का एक प्रमुख चालक बना हुआ है।
इस तरह दर्ज की गई तेजी
अप्रैल-जनवरी 2025-26 के दौरान, सेवा निर्यात 354.13 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.57 प्रतिशत अधिक है, जब यह 320.28 अरब डॉलर था। 2024-25 में, सेवा निर्यात पहले ही 387.5 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था, जिससे 188.8 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष प्राप्त हुआ। इसने भारत को प्रौद्योगिकी, व्यवसाय और पेशेवर सेवाओं के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।
निर्यात में विविध क्षेत्रों का योगदान
माल निर्यात के मोर्चे पर, विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक वृद्धि दर्ज की गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात तेजी से बढ़ा है और यह सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक के रूप में उभरा है। इसके अलावा, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, वस्त्र और आॅटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों ने भी निर्यात प्रदर्शन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उल्लेखनीय है कि रक्षा निर्यात 2024-25 में रिकॉर्ड 23,622 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो उच्च-मूल्य विनिर्माण में भारत की बढ़ती उपस्थिति को दशार्ता है।
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