एक डॉलर की कीमत 14.2 लाख रियाल पहुंची
Iran Economic Crisis (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : राजनीतिक अस्थिरता, आंतरिक अशांति और अमेरिका के साथ बिगड़ते रिश्ते ईरान को आर्थिक संकट में फंसा रहे हैं। या यूं कह लें कि ईरान अब तक के अपने सबसे बड़े आर्थिक संकट के मुहाने पर खड़ा है। दरअसल ईरान में आतंरिक माहौल बड़े पैमाने पर बिगड़ रहा है। जानकारों का कहना है कि ईरान इस समय साल 2022 के ‘महसा अमीनी’ प्रदर्शनों के बाद के सबसे बड़े नागरिक असंतोष का सामना कर रहा है। सोमवार को ईरान के प्रमुख शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए, इसका मुख्य कारण राष्ट्रीय मुद्रा ‘रियाल’ में आई रिकॉर्ड गिरावट और गहराता आर्थिक संकट है।
अब तक के निचले स्तर पर पहुंची ईरानी मुद्रा
इस तनाव की सबसे बड़ी वजह ईरानी रियाल का ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच जाना है। सोमवार को रियाल डॉलर के मुकाबले 14.2 लाख के स्तर पर आ गया। 2015 के परमाणु समझौते के दौरान डॉलर के मुकाबले रियाल की कीमत लगभग 32,000 थी। इस आर्थिक गिरावट ने देश में कई गंभीर संकट पैदा कर दिए हैं। महंगाई चरम पर है। दैनिक जरूरतों और खाद्य पदार्थों की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है, जिससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों का बजट पूरी तरह चरमरा गया है।
21 मार्च से शुरू होने वाले ईरानी नववर्ष में सरकार की ओर से कर बढ़ाने की खबरों ने जनता के गुस्से को और भड़का दिया है। पेट्रोल की कीमतों में हालिया बदलावों ने महंगाई के दबाव को और बढ़ा दिया है, इसका सीधा असर परिवहन और रसद पर पड़ा है।
ईरान के सेंट्रल बैंक के प्रमुख ने दिया इस्तीफा
आर्थिक मोर्चे पर बढ़ते दबाव का पहला बड़ा राजनीतिक असर ईरान के सेंट्रल बैंक के प्रमुख मोहम्मद रजा फरजीन के इस्तीफे के रूप में सामने आया है। मुद्रा में लगातार आ रही गिरावट और बढ़ते विरोध के बीच उन्होंने अपना पद छोड़ दिया है। तेहरान के कई हिस्सों में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए दंगा रोधी पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। सोशल मीडिया और स्थानीय समाचार एजेंसियों के अनुसार, सड़कों पर सरकार विरोधी नारे भी सुने गए।
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