पश्चिम एशिया तनाव से उत्पन्न स्थिति में अंतर मंत्रालयी प्रेस वार्ता में दी गई जानकारी
West Asia Crisis (द भारत ख़बर), नई दिल्ली : अमेरिका और इजरायल द्वारा पिछले दिनों ईरान पर किए गए हमलों के बाद पश्चिम एशिया में उत्पन्न स्थिति पर भारत न केवल करीब से नजर रख रहा है बल्कि कूटनीतिक और राजनीतिक उपाय निकाल रहा है। अंतर-मंत्रालयी प्रेस वार्ता से यह साफ है कि भारत सरकार पश्चिम एशिया के ऊर्जा और भू-राजनीतिक संकट से निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है।
घरेलू ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के साथ-साथ कूटनीतिक संवाद और समुद्री सुरक्षा के मोर्चे पर उठाए गए ये कदम भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक झटकों से बचाने में एक ढाल का काम कर रहे हैं। पश्चिम एशिया संकट के बीच समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा को लेकर बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने आश्वस्त किया कि पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय ध्वज वाले जहाज या भारतीय नाविकों से जुड़ी कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई है।
यह बताया गया कि इस दौरान डीजी शिपिंग के माध्यम से अब तक खाड़ी क्षेत्र से 1800 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित की गई है, जिनमें से 49 नाविक पिछले 24 घंटों के दौरान ही वापस लाए गए हैं। 5 अप्रैल, 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने वाला भारतीय जहाज ‘ग्रीन आशा’ सुरक्षित रूप से जेएनपीए पहुंच गया है।
यूएई का दौरा करेंगे भारत के विदेश मंत्री
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर बहुत करीब से नजर रख रहा है। इसी रणनीतिक पहल के तहत, विदेश मंत्री 11 से 12 अप्रैल 2026 तक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे, जहां दोनों देशों के नेतृत्व के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने पर चर्चा होगी।
इसके अलावा, पेट्रोलियम मंत्री भी 9 और 10 अप्रैल, 2026 को कतर के दौरे पर हैं और भारत खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के अन्य देशों के साथ भी लगातार संपर्क में है। जायसवाल ने पड़ोसी देश बांग्लादेश के साथ संबंधों पर अपडेट देते हुए कहा कि हाल ही में बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने भारत का दौरा किया था और भारत अपनी रिफाइनिंग क्षमता व घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बांग्लादेश को ऊर्जा उत्पादों की आपूर्ति जारी रखे हुए है।
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