
(द भारत ख़बर), नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Droupadi Murmu) ने वीर बाल दिवस (Veer Bal Diwas) के अवसर पर असाधारण उपलब्धियों के लिए आज शुक्रवार को 20 बच्चों को सम्मानित किया। 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ये बच्चे हैं जिन्हें कला, संस्कृति, खेल और इनोवेशन समेत अलग-अलग क्षेत्रों में शानदार उपलब्धियों और योगदान के लिए पुरस्कार दिए गए। राष्ट्रपति ने कार्यक्रम को संबोधित भी किया। उन्होंने कुछ बच्चों की असाधारण उपलब्धियों पर रोशनी डाली और बच्चों को अपना आशीर्वाद भी दिया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि पुरस्कार पाने वाले बच्चों ने बहादुरी, कला और संस्कृति, पर्यावरण, इनोवेशन और विज्ञान और टेक्नोलॉजी सहित कई क्षेत्रों में असाधारण योगदान दिया है। उनके योगदान से देश भर के और बच्चे भी प्रेरित होंगे। उन्होंने कहा, वीर बाल दिवस हर साल श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के बेटों साहिबजादा बाबा जोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी की शहादत की याद में मनाया जाता है, जिनका बेमिसाल बलिदान पीढ़ियों को प्रेरित करता रहता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि जब किसी देश के बच्चे देशभक्ति और ऊंचे आदर्शों से भरे होते हैं, तो उस देश की मानवता पक्की हो जाती है। राष्ट्रपति ने पुरस्कार पाने वाले कुछ बच्चों की असाधारण उपलब्धियों पर रोशनी डाली। आगरा के 9 वर्षीय लड़के अजय राज ने बताया कि जब वे प्यास बुझाने के लिए नदी में पानी लेने गए थे, तो उसने अपने पिता को मगरमच्छ के हमले से बचाया था।
महाराष्ट्र के अर्णव अनुप्रिया महर्षि को उनके दो इनोवेशन के लिए यह सम्मान मिला। अर्णव लकवाग्रस्त मरीजों की रिकवरी में मदद करते हैं। उन्होंने अपने दाहिने हाथ में लकवा होने की अपनी पर्सनल कहानी भी बताई। अर्णव ने कहा, मैंने दो एआई सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन बनाए हैं, जो लकवा से ग्रस्त मरीजों की उंगलियों और हाथों के मूवमेंट में मदद करते हैं। इनको भारत सरकार ने पेटेंट और कॉपीराइट भी किया है।
सपने में भी नहीं सोचा था, यह पुरस्कार मिलेगा
पुरस्कार लेने वालों में एक छोटा बच्चा ऐसा भी था, जिसने ‘आॅपरेशन सिंदूर’ के समय भारतीय सेना के खानपान का ख्याल किया था। राष्ट्रपति से पुरस्कार लेने के बाद उसने कहा, यह पुरस्कार पाकर मैं बहुत खुश हूं। मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे यह पुरस्कार मिलेगा और मैं राष्ट्रपति से मिलूंगा। पुरस्कार विजेता ने बताया कि जब ‘आॅपरेशन सिंदूर’ शुरू हुआ था और सीमापार से पाकिस्तान के ड्रोन भी आ रहे थे, तब भारतीय फौज भी उनके खेतों के पास भी तैनात थी। उसने कहा, तब मैंने उनकी सेवा करने के बारे में सोचा। मैं उनके लिए हर दिन मिठाई, चाय, छाछ और बर्फ लाता था।
सभी बच्चों ने परिवार, समाज व देश का गौरव बढ़ाया
राष्ट्रपति ने कहा, सभी बच्चों ने अपने परिवारों, समाज और पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। इसलिए, मैं इन बच्चों के परिवार के सदस्यों को भी बधाई देती हूं। इतने अच्छे और होनहार बच्चों के लिए पुरस्कार समारोह आयोजित करने के लिए मैं महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी और उनकी पूरी टीम की सराहना करती हूं।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, वीर बाल दिवस हर साल 26 दिसंबर को सिख धर्म के दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के बेटों, साहिबजादों के साहस और बलिदान का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है।
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