पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कैंटोनमेंट बोर्ड में कार्यरत कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए उनके वेतन से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि पंप अटेंडेंट, पंप ड्राइवर और फिटर जैसे पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को उनकी शुरुआती नियुक्ति की तारीख से 140-300 रुपये का संशोधित वेतनमान दिया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह वेतनमान पंजाब सरकार के समान पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के बराबर होगा।
इस मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस हरप्रीत सिंह ब्रार ने कहा कि याचिकाकर्ता पिछले करीब 15 वर्षों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे, लेकिन उन्हें उनकी शैक्षणिक और तकनीकी योग्यता के अनुरूप वेतन नहीं दिया गया। अदालत के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि याचिकाकर्ताओं के पास मैट्रिक के साथ दो साल का आईटीआई डिप्लोमा है, जिसके आधार पर वे उच्च वेतनमान पाने के पात्र हैं।
मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता गर्गी कुमार, बिंदू गोयल और परीतिश गोयल ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ताओं की योग्यता और कार्य जिम्मेदारियां पंजाब सरकार के पब्लिक हेल्थ विभाग, जिसे अब जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग के नाम से जाना जाता है, में कार्यरत पंप ड्राइवर और प्लंबर जैसे पदों के समान हैं। इस आधार पर हाईकोर्ट ने माना कि समान कार्य और योग्यता होने के कारण उन्हें भी समान वेतनमान मिलना चाहिए।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में 13 मई 1969 को हुए मेमोरेंडम ऑफ सेटलमेंट का भी हवाला दिया। अदालत ने कहा कि इस समझौते में स्पष्ट रूप से तय किया गया था कि कैंटोनमेंट बोर्ड के कर्मचारियों को राज्य सरकार के समान पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के बराबर वेतन और भत्ते दिए जाएंगे। इसके बावजूद संशोधित वेतनमान लागू नहीं करना नियमों के विपरीत है।
अदालत ने कैंटोनमेंट बोर्ड के रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि एक मॉडल नियोक्ता के रूप में बोर्ड का आचरण निष्पक्ष और पारदर्शी होना चाहिए था, लेकिन इस मामले में कर्मचारियों को भरोसा दिलाकर याचिका वापस करवाना और बाद में लाभ नहीं देना विश्वासघात और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं को उनकी नियुक्ति की तारीख से संशोधित वेतनमान दिया जाए। साथ ही अदालत ने निर्देश दिए कि तीन महीने के भीतर एरियर की गणना पूरी की जाए और इसके बाद एक महीने के अंदर पूरी राशि का भुगतान किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि कर्मचारियों को 12 अक्टूबर 2022 से भुगतान की तारीख तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी दिया जाएगा।
हाईकोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि यदि कैंटोनमेंट बोर्ड अदालत के आदेशों का पालन नहीं करता है, तो याचिकाकर्ताओं को अवमानना याचिका दायर करने का अधिकार होगा। इस फैसले को कैंटोनमेंट बोर्ड कर्मचारियों के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है और इससे अन्य कर्मचारियों को भी अपने अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने का रास्ता मिल सकता है।

