केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने एक बार फिर सार्वजनिक मंच से अपने राजनीतिक कद और हिस्सेदारी को लेकर नाराजगी खुलकर जाहिर की है। उन्होंने कहा कि हम सरकारें बनाते हैं, लेकिन उसके बदले में अगर हमें हमारा वाजिब इनाम नहीं मिलता तो क्या यह बात गलत है। राव इंद्रजीत सिंह का यह बयान सियासी गलियारों में एक बार फिर हलचल पैदा कर रहा है।
राजस्थान के झुंझुनूं जिले के गांव सोहली में 14 जनवरी को आयोजित एक निजी स्कूल के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि लोग अकसर कहते हैं कि अगर इंद्रजीत सिंह मुख्यमंत्री से नहीं लड़ता तो कोई चेयरमैन बन जाता, कोई मंत्री बन जाता। इस पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि अगर हम किसी का साथ नहीं देते तो पार्टी सत्ता में ही नहीं आती, फिर बाकी लोग कहां के होते।
राव इंद्रजीत सिंह ने इस दौरान अहीर रेजिमेंट को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि 1857 में हमारे पूर्वजों ने अंग्रेजों के खिलाफ लोहा लिया था, इसी वजह से अहीर रेजिमेंट का गठन नहीं हुआ। उन्होंने रेजांगला युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि जब घुसपैठिए कश्मीर पर कब्जा करने आए थे, तब अहीर समाज के जवान सीना तानकर खड़े हुए थे। राव ने कहा कि अहीर रेजिमेंट की मांग आगे भी उठती रहेगी और इसके लिए प्रयास कभी नहीं रुकेंगे।
अपने राजनीतिक इतिहास का जिक्र करते हुए राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि उनके पिता राव बिरेंद्र सिंह ने विशाल हरियाणा पार्टी का गठन किया था। उस समय उनका सपना था कि पंजाब से अलग होकर विशाल हरियाणा बने, जिसकी राजधानी दिल्ली हो और जिसमें अलवर, भरतपुर, मेरठ और दिल्ली के आसपास के वे इलाके शामिल हों, जिन्होंने 1857 की क्रांति में अंग्रेजों से संघर्ष किया था। बाद में विशाल हरियाणा पार्टी का कांग्रेस में विलय हो गया।
राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि 1981 में विशाल हरियाणा पार्टी के 16 विधायक थे और उनका राजघराना 1857 में अंग्रेजों से लड़ते-लड़ते खत्म हो गया था। उन्होंने कहा कि अगर आज लोग उन्हें राजा कहते हैं तो यह जनता की भावना है। उन्होंने बताया कि जनता ने उन्हें छह बार लोकसभा और चार बार विधानसभा में जिताया है और यही जनसमर्थन उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
उन्होंने परिसीमन को लेकर भी भेदभाव का आरोप लगाया। राव ने कहा कि 1977 में परिसीमन के दौरान पूरे हरियाणा में विधानसभा सीटें बढ़ाई गईं, लेकिन महेंद्रगढ़ जिले से कनीना विधानसभा क्षेत्र घटा दिया गया। इसी तरह रेवाड़ी जिले में साल्हावास विधानसभा सीट को भी खत्म कर दिया गया, जबकि वहां से उनके परिवार की महिला दो बार विधायक रह चुकी थीं।
राव इंद्रजीत सिंह का विभिन्न मुख्यमंत्रियों के साथ टकराव कोई नई बात नहीं रही है। कांग्रेस शासन के दौरान भूपेंद्र सिंह हुड्डा से उनकी तल्खी खुलकर सामने आई थी। इसके बाद भाजपा सरकार में मनोहर लाल खट्टर के कार्यकाल में भी रिश्ते तनावपूर्ण रहे। मौजूदा समय में नायब सैनी सरकार में उनकी बेटी आरती राव कैबिनेट मंत्री हैं, इसके बावजूद राव इंद्रजीत सिंह मुख्यमंत्री के मंच से यह कह चुके हैं कि हमने सरकार बनवाई है, हमारी बात सुनी जानी चाहिए।
राजनीतिक दबाव बनाने के लिए राव इंद्रजीत सिंह की डिनर डिप्लोमेसी भी चर्चित रही है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दौर में वे सांसदों और विधायकों को डिनर पर बुलाकर अपनी ताकत का प्रदर्शन करते रहे हैं। हाल ही में चंडीगढ़ में आरती राव के सरकारी आवास पर दक्षिण हरियाणा के विधायकों को दिए गए डिनर ने भी राजनीतिक हलकों में खूब चर्चा बटोरी।
फिलहाल हरियाणा में राव इंद्रजीत सिंह का परिवार इकलौता ऐसा सियासी परिवार है जिसके पास दो मंत्री पद हैं। राव इंद्रजीत सिंह केंद्र में राज्य मंत्री हैं, जबकि उनकी बेटी आरती राव हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं। यह स्थिति भाजपा के एक परिवार–एक पद के सिद्धांत के बावजूद राजनीतिक रूप से खास मानी जा रही है।



