फरीदाबाद. हरियाणा के फरीदाबाद में इस बार दशहरे पर 80 फीट ऊंचे रावण का दहन किया जाएगा. यह फरीदाबाद का सबसे बड़ा रावण होगा. इसकी खासियत सिर्फ इसकी ऊंचाई नहीं, बल्कि इसे बनाने का पारंपरिक तरीका और इसमें किए गए नए प्रयोग भी हैं. रावण के हाथों की बनावट से लेकर ढाल और तलवार तक में खास काम किया गया है. इस पुतले को बनाने वाले कारीगर स्वराज अहमद मथुरा के रहने वाले हैं. उनका परिवार पिछले नौ पीढ़ियों से रावण के पुतले बनाने का काम कर रहा है. इस बार भी पूरा परिवार मिलकर रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले तैयार कर रहा है. लोकल 18 से कारीगर स्वराज अहमद बताते हैं कि मथुरा का रहने वाला हूं. हमारे परिवार में कई पीढ़ियों से रावण के पुतले बनाने का काम होता आ रहा है. हम पिछली नौ पीढ़ियों से इस काम को कर रहे हैं. आज भी पूरा परिवार मिलकर इस काम को आगे बढ़ा रहा है. हम खुद ही पुतले बनाते हैं और उन्हें तैयार करके मौके पर खड़ा करने तक का काम करते हैं.
स्वराज अहमद बताते हैं कि इस बार फरीदाबाद में 80 फीट ऊंचा रावण बनाया जा रहा है. पिछले साल हमने 65 फीट का रावण बनाया था, लेकिन इस बार इसकी ऊंचाई बढ़ाकर 80 फीट कर दी गई है. यह फरीदाबाद का सबसे बड़ा रावण होगा. इसके साथ कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले भी बनाए जा रहे हैं. कुंभकरण का पुतला 60 फीट और मेघनाथ का पुतला भी 60 फीट ऊंचा होगा. इन तीनों पुतलों को तैयार करने में करीब एक महीने का समय लग रहा है.
हर साल कुछ नया
स्वराज अहमद के मुताबिक इस बार रावण के पुतले में कुछ नया करने की कोशिश की गई है. इसके हाथों और बाजुओं को अलग तरीके से बनाया गया है. रावण की ढाल और तलवार को घूमने वाली बनाया गया है. यह इस बार की खासियत है. हम चाहते हैं कि हर साल कुछ नया किया जाए, ताकि लोगों को पुतले में कुछ अलग देखने को मिले. पुतले को बनाने में छोटी-छोटी चीजों का ध्यान रखना पड़ता है, जिससे उसकी बनावट अच्छी और साफ-सुथरी दिखाई दे.
मथुरा से लाते हैं बांस, कागज
स्वराज अहमद बताते है कि वे बांस, कागज और दूसरी जरूरी सामग्री मथुरा से लेकर आते हैं. पुतले पर फूल-पत्तियां, आंखें, नाक और मुंह बनाने के साथ रंग-पेंट का काम भी किया जाता है. हर चीज को हाथ से तैयार करना पड़ता है. इस काम में परिवार के सात से दस लोग लगे हुए हैं. सभी मिलकर पुतले को तैयार करते हैं. यही हमारे परिवार का रोजगार है. हम इसी काम से अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं. मेरी उम्र 65 साल हैं. इससे पहले हमारे परिवार के लोग मुंबई में भी रावण के पुतले बनाते थे. मेरे पिताजी करीब 52 साल तक इस काम से जुड़े रहे. इसके बाद हम फरीदाबाद आ गए. अब यहां फरीदाबाद में करीब 15 साल से रावण के पुतले बना रहे हैं. हर साल दशहरे के लिए पुतले तैयार करते हैं.