शिदें ने ढाई साल तक बीएमसी मेयर पद मांगा, सभी 29 पार्षदों को होटल में शिफ्ट किया
BMC Mayor, (द भारत ख़बर), मुंबई: बीएमसी चुनाव परिणाम के बाद महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। शिदें गुट द्वारा अपने सभी 29 पार्षदों को बांद्रा के होटल ताज लैंड्स एंड में शिफ्ट कर दिया गया है। होटल के बाहर कड़ा पहरा भी लगाया गया है। शिदें गुट के इस कदम से भाजपा की मुश्किल बढ़ गई है। बीएमसी चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन मेयर पद के लिए भाजपा को शिदें गुट का समर्थन जुटाना होगा।
वहीं सूत्रों के मुताबिक शिंदे गुट का कहना है कि 2026 शिवसेना संस्थापक बाला साहेब ठाकरे का जन्म शताब्दी वर्ष है। इसलिए कम से कम ढाई साल शिवसेना का मेयर होना चाहिए। इस पर भाजपा-शिंदे गुट में खींचतान शुरू हो गई है।
भाजपा ने जीते 89 वार्ड
मुंबई के 227 वार्डों में से भाजपा ने 89 वार्ड जीते हैं। शिंदे गुट ने 29 वार्ड जीते हैं। बहुमत के आंकड़े 114 के लिए भाजपा को शिंदे गुट के 29 पार्षदों की जरूरत है। उद्धव के मराठी कार्ड खेलने से शिंदे गुट के पार्षदों की संख्या सीमित रह गई। अब शिंदे गुट ने मेयर पद का दांव चला है। अगर भाजपा यह मांग नहीं मानती, तो सत्ता के समीकरण बिगड़ सकते हैं। इसके चलते शिंदे ने तय किया है कि होटल में ही बैठक कर पार्टी नेता का चुनाव किया जाएगा।
बुधवार तक होटल में रहने के निर्देश
सूत्रों का कहना है कि हॉर्स-ट्रेडिंग को रोकने के लिए यह सब किया जा रहा है। सभी 29 पार्षदों को बुधवार दोपहर 3 बजे तक होटल में रहने का निर्देश दिया गया है। यानी अगले 3 दिन वहीं रहना होगा। इससे पहले 2017 में नगर निगम चुनावों के बाद अविभाजित शिवसेना ने 7 मनसे कॉपोर्रेटर का दलबदल करवाया था।
2022 की यादें हुई ताजा
शिंदे गुट का पार्षदों को होटल में रखना, 2022 की उस बगावत की भी यादें ताजा कर रहा है, जिसके कारण शिवसेना टूट गई थी। दरअसल, मई 2022 महाराष्ट्र सरकार में नगर विकास मंत्री और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने 39 विधायकों के साथ बगावत कर दी थी। शिंदे ने मणिपुर के नबाम रेबिया केस का फायदा उठाया था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने सत्ता से बागी हुए विधायकों की सरकार बना दी थी। साथ ही शिंदे ने महाराष्ट्र विधानसभा में डिप्टी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे दिया था, ताकि डिप्टी स्पीकर शिंदे गुट के 16 विधायकों की अयोग्यता पर फैसला न ले पाएं।
एकनाथ शिंदे खुद नहीं चाहते कि बीएमसी में भाजपा का मेयर बने
इधर, रविवार को उद्धव गुट के संजय राउत ने दावा किया है कि एकनाथ शिंदे खुद नहीं चाहते कि बीएमसी में भाजपा का मेयर बने। इसलिए वे पार्षदों को होटल में रखे हुए हैं। वहीं, मुंबई में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने यह कहकर अटकलों को और बढ़ा दिया कि अगर भगवान चाहेंगे तो उनकी पार्टी का मेयर हो सकता है।
शिवसेना (यूबीटी) दूसरी सबसे बड़ी पार्टी, पूरा विपक्ष एकजुट करने के बाद भी चाहिए 8 पार्षद
शिवसेना (यूबीटी) 65 वार्डों के साथ दूसरे स्थान पर रही, जबकि मनसे ने 6 सीटें और एनसीपी (एसपी) को 1 सीट मिली है। इन तीनों की कुल सीटें 72 हैं। कांग्रेस ने 24 वार्डों में, ओवैसी की पार्टी ने 8 सीटों पर और समाजवादी पार्टी ने 2 वार्डों में जीत हासिल की है। अगर पूरा विपक्षी खेमा एक हो भी जाए तो कुल आंकड़ा 106 होगा। यानी बहुमत से 8 सीटें कम। यहीं से पार्षदों की खरीद-फरोख्त और दलबदल का खतरा नजर आ रहा है। ठाकरे परिवार अगर 8 पार्षदों को अपने साथ मिलाने में कामयाब होता है तो बीएमसी पर भाजपा का कब्जा रोक सकती है।
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