कहा, पश्चिमी देशों को विकासशील देशों यानी ग्लोबल साउथ में अपना मार्केट शेयर बढ़ाने के लिए अधिक आक्रामक होना चाहिए
Business News Hindi (द भारत ख़बर), नई दिल्ली : अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में दिए गए एक बयान ने नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। इसके साथ ही उन्होंने विकासशील देशों विशेषकर अफ्रीकी देशों की चिंता को बढ़ा दिया है। दरअसल म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि पश्चिमी देशों को विकासशील देशों यानी ग्लोबल साउथ में अपना मार्केट शेयर बढ़ाने के लिए अधिक आक्रामक होना चाहिए।
रुबियो ने इसे नया पश्चिमी सदी बनाने की दिशा में कदम बताया, जिसमें उद्योगों को मजबूत करना, सप्लाई चेन सुरक्षित करना और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाना शामिल है। रुबियो ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पश्चिमी देशों का प्रभाव कम हुआ, खासकर साम्यवादी और उपनिवेश विरोधी आंदोलनों के कारण।
उनके बयान से विकासशील देशों में चिंता बढ़ी, क्योंकि मार्केट शेयर बढ़ाने की भाषा पुराने औपनिवेशिक दौर की याद दिलाती है।
दक्षिण अफ्रीका की अफ्रीकी देशों को एकजुट होने की अपील
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने अफ्रीकी देशों को एकजुट रहने और अपने खनिज संसाधनों की सुरक्षा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नई तरह की उपनिवेशवाद से बचना जरूरी है। इसके साथ ही कई जाने-माने विश्लेषकों ने रुबियो के बयान की आलोचना की है। रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी और भू-राजनीतिक टिप्पणीकार अर्नोद बर्ट्रेंड ने इसे साम्राज्यवादी सोच जैसा बताया।
वहीं भारत के विश्लेषक देबब्रत भादुड़ी और संजय बारू ने कहा कि भारत जैसे देशों को, जो लंबे समय तक उपनिवेशवाद के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं, इस तरह की सोच का खुलकर विरोध करना चाहिए। आलोचकों ने इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी का उदाहरण दिया, जो पहले व्यापारिक कंपनी थी और बाद में राजनीतिक व सैन्य ताकत बन गई।
विश्लेषकों ने बयान को ट्रंप प्रशासन की नीति से जोड़ा
इतना ही नहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान अमेरिका की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में व्यापार, टैरिफ और प्रतिबंधों के जरिए पश्चिमी प्रभाव को फिर से मजबूत करने पर जोर देती है। आलोचकों का कहना है कि नियंत्रण वापस लेने और प्रभाव फिर से स्थापित करने जैसी भाषा पुराने दौर की याद दिलाती है।

