ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के युद्ध का आज 21वां दिन
West Asia Crisis (द भारत ख़बर), यरूशलम : अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों का आज 21वां दिन है। इन 21 दिन में जहां इन दोनों देशों की सेनाओं ने ईरान पर हजारों बम गिराए हैं वहीं ईरान ने भी इन हमलों का पूरी मजबूती से जवाब दिया है। जिसके चलते अमेरिका और इजरायल को भी इस युद्ध में व्यापक क्षति पहुंची है। इसी बीच इजरायल के प्रधानमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान युद्ध को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि वह पूरी तरह सुरक्षित हैं। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि अमेरिका को इस युद्ध में नहीं धकेला गया है। अमेरिका इजरायल के लिए नहीं, बल्कि इजरायल के साथ मिलकर युद्ध लड़ रहा है।
हवा से क्रांति नहीं हो सकती
नेतन्याहू ने कहा कि अब ईरान के पास यूरेनियम समृद्ध करने या बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की क्षमता नहीं है। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि ईरानी लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे या देश पर नियंत्रण हासिल करेंगे। नेतन्याहू ने कहा कि हवा से क्रांति नहीं की जा सकती, इसके लिए जमीन पर भी कोई कदम होना चाहिए। जमीन पर कदम उठाने के कई रास्ते हो सकते हैं, लेकिन मैं उनका विवरण साझा नहीं करूंगा।
हिजबुल्ला ने इजरायली ठिकानों पर हमले किए
लेबनान के सशस्त्र समूह हिजबुल्ला ने कहा है कि उसने उत्तरी इजरायल के मार्गालियोट इलाके पर मिसाइलों से हमला किया है। इसके अलावा, हिजबुल्ला ने दावा किया कि उसने लेबनान के नबातियेह प्रांत के मारौन अल-रास कस्बे में मौजूद इस्राइली सैनिकों के एक समूह को भी निशाना बनाया।
ईरान के हमलों और होर्मुज जलसंधि बंद करने की निंदा
कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, जापान और यूनाइटेड किंगडम के नेताओं ने ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। इन देशों ने असैनिक वाणिज्यिक जहाजों, नागरिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और तेल-गैस प्रतिष्ठानों पर हमले और होर्मुज जलसंधि को लगभग बंद करने की घटनाओं की सबसे कड़ी शब्दों में निंदा की। साथ ही इन देशों ने ईरान से अनुरोध किया है कि वह अपनी धमकियां और जलसंधि बंद करने के प्रयास रोक दे। बयान में कहा गया है कि नेविगेशन की स्वतंत्रता अंतरराष्ट्रीय कानून का एक मूलभूत सिद्धांत है।

