विशेष सेशन के दौरान 1550 अंक की गिरावट के क्या हैं मायने
Share Market Update (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह दूसरी बार हुआ था कि रविवार को शेयर बाजार खुले हों। दोनों बार ही ऐसा तब हुआ जब इस दिन देश का बजट पेश किया गया हो। हालांकि रविवार को जब बजट के चलते शेयर बाजार को विशेष रूप से खुला रखा गया और कारोबार शुरू हुआ तो किसी ने भी नहीं सोचा था कि बाजार बंद होने के समय शेयर बाजार बड़ी गिरावट के साथ बंद होगा। हालांकि यह संकेत तो स्पष्ट था कि शेयर बाजार में कोई बहुत ज्यादा बढ़त बजट की वजह से नहीं आएगी लेकिन यह इतनी बुरी तरह से टूट जाएगा ऐसी उम्मी भी किसी को नहीं थी।
शेयर बाजार में इनती गिरावट दर्ज की गई
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स दोपहर के कारोबार में 2,370.36 अंक या 2.88 प्रतिशत गिरकर 80,000 के स्तर से नीचे 79,899.42 पर आ गया। बैरोमीटर 80,722.94 पर स्थिर हुआ, जिसमें 1,546.84 अंक या 1.88 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 495.20 अंक या 1.96 प्रतिशत गिरकर 24,825.45 पर बंद हुआ। दिन के दौरान इसमें 748.9 अंक या 2.95 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 24,571.75 पर पहुंचा।
यह रहा गिरावट का मुख्य कारण
बजट में प्रमोटरों की ओर से दुरुपयोग को रोकने के लिए अतिरिक्त बायबैक कर का प्रावधान लाया गया। इससे कॉरपोरेट प्रमोटरों के लिए प्रभावी टैक्स 22 प्रतिशत और गैर-कॉरपोरेट प्रमोटरों के लिए प्रभावी टैक्स 30 प्रतिशत हो जाएगा। सभी शेयरधारकों के बायबैक पर पूंजीगत लाभ के रूप में कर का प्रस्ताव है। वायदा सौदों पर एसटीटी को बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत किया गया। गैर कॉरपोरेट प्रवर्तकों के लिए 30 प्रतिशत टैक्स लगाया गया।
सभी शेयरधारकों के बायबैक पर पूंजीगत लाभ के रूप में कर का प्रस्ताव लाया गया। जानकारों का कहना है कि बाजार में बेचैनी मुख्य रूप से एफएंडओ पर एसटीटी में वृद्धि, विशेष रूप से वायदा पर हुई तेज वृद्धि पर केंद्रित है। यह पिछले साल के उच्च पूंजीगत लाभ करों के बाद आया है, जिससे बाजार प्रतिभागियों के लिए समग्र लेनदेन लागत बढ़ गई है। उनका कहना है कि एफएंडओ में प्रस्तावित बढ़ी हुई एसटीटी अल्पावधि में पूंजी बाजार संस्थाओं के लिए निराशाजनक है, लेकिन लंबी अवधि में यह फायदेमंद साबित हो सकती है।
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