फरीदाबाद. नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के साथ घर के मुख्य दरवाजे को सजाने का भी विशेष महत्व है. इस दौरान कई लोग दरवाजे पर आम के पत्तों का तोरण लगाते हैं, कुमकुम से स्वास्तिक बनाते हैं और कलश स्थापित करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि तोरण लगाने से पहले उसकी पूजा करना भी जरूरी माना जाता है. आम के पत्तों का तोरण कैसे लगाना चाहिए और नवरात्रि के बाद उसे कैसे हटाएं. लोकल 18 से फरीदाबाद के ज्योतिषाचार्य पंडित उमा चंद्र मिश्रा बताते हैं कि नवरात्रि में घर के मुख्य दरवाजे पर कुमकुम से स्वास्तिक या श्री का चिह्न बनाना शुभ माना जाता है. आम के पत्तों का तोरण या बंदनवार भी लगाना चाहिए. ध्यान रखें कि तोरण में इस्तेमाल होने वाले पत्ते कटे-फटे नहीं होने चाहिए और जिस धागे में उन्हें बांधा जा रहा है, वह भी सही होना चाहिए.
पूजा क्यों जरूरी
पंडित उमा चंद्र मिश्रा के मुताबिक आम को देवताओं का वृक्ष माना जाता है. इसे फलों का राजा भी कहा जाता है. इसी वजह से पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों में आम के पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, लोग अक्सर तोरण तो लगा देते हैं, लेकिन उसकी पूजा नहीं करते. तोरण लगाने से पहले गंगाजल छिड़ककर और विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए. इसके बाद ही उसे दरवाजे पर लगाना चाहिए. तोरण मुख्य दरवाजे पर लगाना श्रेष्ठ माना जाता है. हालांकि, घर का मुख्य द्वार किस दिशा में है, यह भी ध्यान देने वाली बात है. पूरे घर में एक ही बंदनवार लगाना चाहिए. कई जगहों पर लोग अलग-अलग बंदनवार लगा देते हैं, जबकि ऐसा करने से बचना चाहिए.
पंडित उमा चंद्र मिश्रा कहते हैं कि स्वास्तिक भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है. नवरात्रि में मुख्य दरवाजे पर स्वास्तिक बनाने के साथ श्री का चिह्न भी बनाना चाहिए. स्वास्तिक बनाते समय उसकी चारों भुजाओं पर बिंदियां लगाना भी जरूरी बताया गया है. इससे पूजा की परंपरा का विधिवत पालन किया जा सकता है. कलश में देवी-देवताओं का वास माना जाता है. कलश के मुख में भगवान विष्णु और कंठ में भगवान रुद्र का स्थान होता है. घर की मुख्य देहरी पर चावल रखकर उसके ऊपर कलश स्थापित करना शुभ माना जाता है.
न करें ये गलती
पंडित उमा चंद्र मिश्रा बताते हैं कि नवरात्रि के बाद जब तोरण या बंदनवार को दरवाजे से हटाएं, तो उसे इधर-उधर नहीं फेंकना चाहिए. धार्मिक मान्यता के अनुसार, उसे जल में प्रवाहित कर देना चाहिए. तोरण हटाते समय भी इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इन परंपराओं का पालन करते हुए श्रद्धालु नवरात्रि में अपने घर के मुख्य दरवाजे की सजावट और पूजा कर सकते हैं.

