हरियाणा में मतदाता सूचियों की जांच के दौरान एक बड़ा आंकड़ा सामने आया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में करीब 29 लाख ऐसे मतदाता पाए गए हैं, जिनमें मतदाता और उनके पिता का नाम एक जैसा दर्ज है। इस असमान्यता को लेकर निर्वाचन विभाग ने पहचान की पुष्टि के लिए खंड स्तरीय अधिकारियों यानी बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की ड्यूटी लगा दी है। बीएलओ घर-घर जाकर मतदाता सूची में दर्ज पते पर संबंधित लोगों के दस्तावेजों की जांच करेंगे।
निर्वाचन विभाग के अनुसार, जांच में जो मतदाता सही पाए जाएंगे, उनका नाम मतदाता सूची में बना रहेगा, जबकि फर्जी या अपात्र पाए जाने वाले नामों को सूची से हटाया जाएगा। विभाग का कहना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से की जा रही है, ताकि भविष्य के चुनावों में किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
गौरतलब है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने नवंबर 2025 में हरियाणा में 25 लाख फर्जी मतदाताओं के सहारे भाजपा पर सरकार बनाने का आरोप लगाया था। उन्होंने इस दौरान एक ब्राजीलियन मॉडल की तस्वीर दिखाते हुए दावा किया था कि उसका नाम सोनीपत के राई विधानसभा क्षेत्र के 10 बूथों पर 22 स्थानों पर मतदाता सूची में दर्ज है। इसके अलावा एक अन्य महिला की तस्वीर दिखाकर कहा गया था कि उसकी फोटो हरियाणा में 100 जगह अलग-अलग नामों से वोटर लिस्ट में शामिल है। हालांकि निर्वाचन विभाग द्वारा कराई गई जांच में ये आरोप सही नहीं पाए गए।
इसके बावजूद जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि प्रदेश में 29 लाख मतदाताओं के नाम ऐसे हैं, जिनमें मतदाता और उसके पिता का नाम समान दर्ज है। इसी वजह से निर्वाचन विभाग ने इन सभी मामलों की अलग-अलग पुष्टि कराने का निर्णय लिया है। विभाग का मानना है कि नाम समान होना जरूरी नहीं कि फर्जीवाड़ा हो, लेकिन सत्यापन जरूरी है।
हरियाणा में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अप्रैल में संभावित है। इसकी औपचारिक घोषणा से पहले ही निर्वाचन विभाग तैयारियों में जुट गया है। करीब 21 हजार बीएलओ वर्ष 2002 की मतदाता सूची के साथ वर्तमान सूची का मिलान कर रहे हैं। प्रदेश में कुल दो करोड़ सात लाख से अधिक मतदाता हैं, जिनमें से अब तक एक करोड़ 21 लाख, यानी लगभग 58 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी की जा चुकी है।
निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं का नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, लेकिन उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम उस सूची में मौजूद है, उन्हें अतिरिक्त दस्तावेज देने की जरूरत नहीं होगी। अन्य मतदाताओं को अपनी पहचान के प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे, तभी उनका मताधिकार सुरक्षित रह पाएगा।
हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए. श्रीनिवास ने बताया कि राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों की विस्तृत जांच कराई गई थी, जिसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने नहीं आई। हालांकि मतदाता सूचियों में पिता-पुत्र के समान नाम वाले 29 लाख मतदाताओं का मामला सामने आने के बाद बीएलओ को सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने बताया कि सभी मतदाताओं की मैपिंग का काम तेजी से चल रहा है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतदाताओं से अपील की है कि वे बीएलओ को सही जानकारी और आवश्यक सहयोग दें, ताकि राज्य की मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध और भरोसेमंद बनाई जा सके। जिन मतदाताओं को वर्ष 2002 की मतदाता सूची में अपना या अपने परिजनों का विवरण नहीं पता है, वे निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर जाकर ‘Search your name in last SIR’ विकल्प के जरिए जानकारी हासिल कर सकते हैं।


