सरकारी कर्मचारियों को अपनी सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी के लिए आमतौर पर 10 साल का इंतजार करना पड़ता है। इसकी वजह यह है कि नया वेतन आयोग हर 10 साल पर लागू होता है। वैसे इन कर्मचारियों के वेतन में सालाना इन्क्रीमेंट भी होता है, लेकिन यह इतना कम होता है कि इससे सैलरी पर बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि अब फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर रहने के बजाय सालाना इन्क्रीमेंट की दर को ही बढ़ाया जाना चाहिए। आइए, इस रिपोर्ट में हम विभिन्न संगठनों की राय और कैलकुलेशन पर नजर डालेंगे।
इन संगठनों की यह है राय
इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग से सालाना 7% वेतन वृद्धि की मांग कर रही है। वहीं, नेशनल काउंसिल ऑफ द जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM), ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन्स (FNPO) जैसे संगठनों ने सालाना 6% वेतन वृद्धि की सिफारिश की है।
संगठनों का मानना है कि अगर इंक्रीमेंट की दर ज्यादा होगी, तो पे कमीशन में ‘हाई फिटमेंट फैक्टर’ पर निर्भरता कम हो जाएगी और कर्मचारियों को अच्छी सैलरी बढ़ोतरी के लिए 10 साल तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
7वें वेतन आयोग में सालाना इन्क्रीमेंट बस 7%
इन संगठनों का कहना है कि 7वें वेतन आयोग के तहत सालाना इंक्रीमेंट सिर्फ 3% है, जिससे निचले स्तर के कर्मचारियों को हर साल ज्यादा फायदा नहीं होता। सालाना इंक्रीमेंट ज्यादा होने से यह समस्या हल हो सकती है, क्योंकि AINSPEF का दावा है कि कर्मचारियों की बेसिक पे 10 साल में दोगुनी हो जाएगी।
8वें वेतन आयोग से सालाना वेतन वृद्धि के लिए सिफारिशें
संगठन प्रस्तावित सालाना वेतन वृद्धि
नेशनल काउंसिल ऑफ द जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) 6%
ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) 6%
फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन्स (FNPO) 6%
ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) 7%
इंडियन रेलवेज टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) 5%
स्रोत: 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए आधिकारिक मेमोरेंडम
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या सालाना इंक्रीमेंट की ऊंची दर काफी होगी या कर्मचारियों को अभी भी फिटमेंट फैक्टर से बढ़ावा मिलने की जरूरत है?
BDO इंडिया में मैनेज्ड सर्विसेज के एसोसिएट पार्टनर रामचंद्रन कृष्णमूर्ति का कहना है कि फिटमेंट फैक्टर लागू होने से सैलरी में तुरंत बड़ी बढ़ोतरी होती है। इसके मुकाबले, अगर सालाना इंक्रीमेंट की दर ज्यादा भी हो, तो भी कुल कमाई के मामले में उस शुरुआती बढ़ोतरी की बराबरी करने में कई साल लग सकते हैं।
कृष्णमूर्ति लेवल 10 के कर्मचारी (बेसिक पे ₹56,100) का उदाहरण देते हुए दो तरीकों की तुलना करते हैं:
एक बार फिटमेंट में बदलाव (जैसे 2.57x वाला तरीका) और उसके बाद हर साल सामान्य 3% की बढ़ोतरी, बनाम पुराने स्केल पर बने रहना, लेकिन सालाना बढ़ोतरी की दर को हमेशा के लिए ज्यादा रखना। उनके अनुमान बताते हैं कि ज्यादा इंक्रीमेंट रेट वाली सैलरी को ज्यादा फिटमेंट फैक्टर और 3% सालाना इंक्रीमेंट रेट वाली सैलरी से आगे निकलने में कई दशक लग सकते हैं।
तरीका पहला साल (बेसिक) 15वां साल (बेसिक) 30वां साल (बेसिक)
एक बार 2.57x संशोधन, फिर 3%/साल ₹ 1,48,502 ₹ 2,24,623 ₹ 3,49,955
कोई संशोधन नहीं, 5%/साल बढ़ोतरी ₹ 58,905 ₹ 1,16,628 ₹ 2,42,461
कोई संशोधन नहीं, 7%/साल बढ़ोतरी ₹ 60,027 ₹ 1,54,782 ₹ 4,27,048
कोई संशोधन नहीं, 10%/साल बढ़ोतरी ₹ 61,710 ₹ 2,34,344 ₹ 9,78,911
- एक बार किया गया बदलाव शॉर्ट-टू-मीडियम टर्म (करियर के शुरुआती 10-20 साल) में ज्यादा फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे बेस तुरंत रीसेट हो जाता है। आपको कंपाउंडिंग का असर दिखने का इंतजार नहीं करना पड़ता।
- ज्यादा इंक्रीमेंट (मौजूदा 3% के मुकाबले 10% से ज्यादा) कुल मिलाकर एक बार होने वाले रिविजन से आगे निकल सकता है, लेकिन ऐसा लगभग 20-25 साल बाद ही होगा और तभी जब यह बढ़ी हुई दर पूरे समय बनी रहे, जो कि इतिहास में ऐसा नहीं हुआ है (छठे CPC के बाद से इंक्रीमेंट 3% के आसपास ही रहे हैं)।
- असल में, ये दोनों एक-दूसरे का विकल्प नहीं हैं। पे कमीशन दोनों को मिलाकर देता है, एक बार मिलने वाला ‘फिटमेंट जंप’ और नई, ज्यादा बेस सैलरी पर मिलने वाला रेग्युलर सालाना इंक्रीमेंट।
अनुमानों के मुताबिक, इंक्रीमेंट की ज्यादा दर कर्मचारियों की सैलरी को बढ़ते खर्चों के साथ तालमेल बिठाने में मदद कर सकती है, लेकिन यह ‘फिटमेंट फैक्टर’ के साथ मिलकर सबसे अच्छा काम करती है।

