बैचलर आॅफ डेंटल सर्जरी में दाखिले के नियमों का उल्लंघन करने पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला
Supreme Court, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: राजस्थान के 10 निजी डेंटल कॉलेजों पर सुप्रीम कोर्ट ने 10-10 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। जुर्माने की रकम सभी कॉलेजों को आठ सप्ताह के भीतर आरएसएलएसए में जमा करनी होगी। यह पैसा वन स्टॉप सेंटर, नारी निकेतन, वृद्धाश्रम और बाल देखभाल संस्थानों जैसे सामाजिक कल्याण के कार्यों में इस्तेमाल किया जाएगा।
इन डेंटल कॉलेजों पर बीडीएस (बैचलर आॅफ डेंटल सर्जरी) में दाखिले के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि इन कॉलेजों ने जानबूझकर नियमों की अनदेखी की, जिससे मेडिकल शिक्षा के मानकों को नुकसान पहुंचा।
राजस्थान सरकार को 10 लाख रुपए आरएसएलएसए में जमा कराने का भी दिया आदेश
न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई और न्यायमूर्ति जेके महेश्वरी की पीठ ने कॉलेजों के साथ-साथ राज्य सरकार की भूमिका पर भी नाराजगी जताई। अदालत ने बीडीएस दाखिले (शैक्षणिक सत्र 2016-17) में कानूनी प्रक्रिया का पालन न करने पर राजस्थान सरकार को 10 लाख रुपए राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (आरएसएलएसए) में जमा करने का आदेश दिया।
क्या था मामला?
बीडीएस में दाखिले के लिए एनईईटी परीक्षा में न्यूनतम प्रतिशत तय है। राजस्थान सरकार ने बिना अधिकार के इस न्यूनतम प्रतिशत में पहले 10 प्रतिशत और फिर पांच प्रतिशत की अतिरिक्त छूट दे दी। इस छूट के कारण कई ऐसे छात्रों को दाखिला मिल गया, जो तय पात्रता पूरी नहीं करते थे। इतना ही नहीं, कुछ कॉलेजों ने इस 10+5 प्रतिशत की छूट से भी आगे जाकर छात्रों को दाखिला दे दिया, जो पूरी तरह नियमों के खिलाफ था।
मानवीय आधार छात्रों को दी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय आधार पर 2016-17 में दाखिला पाए छात्रों को राहत दी। अदालत ने अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए उनकी बीडीएस डिग्री को वैध (रेग्युलराइज) कर दिया। हालांकि, जिन छात्रों को राहत मिली है, उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे राजस्थान हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल करें और राज्य में आपदा, महामारी या किसी आपात स्थिति में नि:शुल्क सेवा देने के लिए तैयार रहें।

