केंद्रीय उद्योग मंत्री ने किया स्पष्ट, किसानों के हित हमारे लिए सबसे ऊपर
India-US Trade Deal (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : दूसरे देशों के साथ तेजी से हो रहे मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के बीच एक बार फिर से उद्योग और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि भारत किसी भी दबाव के सामने नहीं झुकेगा। उद्योग मंत्री से जब पूछा गया कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता कहां पहुंची है तो उन्होंने जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ता काफी सकारात्मक रूप से आगे बढ़ रही है।
दोनों ही देशों में व्यापार समझौते को लेकर कुछ मसले अभी हल करने बाकी हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत अमेरिका के लिए अपना डेयरी बाजार खोल देगा तो इसके जवाब में उन्होंने साफ रूप से मना करते हुए कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं होगा। गोयल ने कहा कि भारत कभी अपना डेयरी सेक्टर नहीं खोलेगा। उन्होंने कहा कि किसानों के हित को सबसे ऊपर रखा गया है।
भारत-न्यूजीलैंड एफटीए पर ये बोले गोयल
गोयल ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड ट्रेड डील में चावल, गेहूं, डेयरी, सोया और अन्य कृषि उत्पादों जैसे संवेदनशील सेक्टर्स को किसी भी तरह की बाजार पहुंच नहीं दी है। दरअसल अमेरिका भारतीय बाजार में कई बार अपने डेयरी प्रोडक्ट्स और जेनेटिकली मोडिफाइड अनाज को बेचने की मांग कर चुका है। गोयल का यह बयान ऐसे समय जब अमेरिका और भारत ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत एडवांस स्टेज में है।
डेयरी प्रोडक्ट्स को लेकर भारत-अमेरिका के बीच विवाद
अमेरिका चाहता है कि उसके डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे दूध, पनीर, घी को भारत में आयात की अनुमति मिले। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और इस सेक्टर में करोड़ों छोटे किसान लगे हुए हैं। भारत सरकार को डर है कि अगर अमेरिकी डेयरी उत्पाद भारत में आएंगे, तो वे स्थानीय किसानों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा धार्मिक भावना भी जुड़ी हुई हैं।
अमेरिका में गायों को बेहतर पोषण के लिए जानवरों की हड्डियों से बने एंजाइम (जैसे रैनेट) को उनके खाने में मिलाया जाता है। भारत ऐसी गायों के दूध को नॉन वेज मिल्क यानी मांसाहारी दूध मानता है। इसके साथ ही अमेरिका चाहता है कि गेहूं, चावल, सोयाबीन, मक्का और फलों जैसे सेब, अंगूर आदि को भारत के बाजार में कम टैक्स पर बेचा जा सके। वह चाहता है कि भारत इन पर अपनी इम्पोर्ट ड्यूटी को कम करे।
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