जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में गुरुवार को हुए दर्दनाक सड़क हादसे में हरियाणा के झज्जर जिले का लाल देश के लिए शहीद हो गया। झज्जर के गांव गिजाड़ौध निवासी आर्मी जवान मोहित उस सैन्य वाहन में सवार थे, जो ड्यूटी के दौरान करीब 400 फीट गहरी खाई में जा गिरा। इस हादसे में कुल 10 जवानों की मौत हो गई, जबकि 11 जवान गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें एयरलिफ्ट कर उधमपुर मिलिट्री हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।
शहीद मोहित के शहादत की खबर गुरुवार देर शाम जैसे ही गांव गिजाड़ौध पहुंची, पूरे गांव में मातम छा गया। घर-घर चूल्हे ठंडे पड़ गए और हर आंख नम हो गई। परिवार के अनुसार, मोहित करीब 5 साल पहले सेना में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। महज एक साल पहले ही उनकी शादी हुई थी और उनकी पत्नी इस समय करीब ढाई महीने की गर्भवती हैं। नवंबर में शादी की सालगिरह पर छुट्टी लेकर गांव आए मोहित ने जल्द लौटने का वादा किया था, लेकिन अब वह तिरंगे में लिपटकर लौट रहे हैं।
गांव के सरपंच नरेश ने बताया कि शहीद मोहित की पार्थिव देह शुक्रवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ गांव लाई जाएगी। सेना और जिला प्रशासन की मौजूदगी में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। प्रशासन की ओर से शहीद को अंतिम सलामी दी जाएगी।
कैसे हुआ जम्मू-कश्मीर में यह दर्दनाक हादसा
यह हादसा जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में भद्रवाह-चंबा इंटरस्टेट रोड पर खन्नी टॉप के पास हुआ। सेना की गाड़ी में कुल 21 जवान सवार थे, जो डोडा से ऊपरी पोस्ट की ओर जा रहे थे। डोडा के डिप्टी कमिश्नर हरविंदर सिंह के अनुसार, सड़क पर जमी बर्फ के कारण ड्राइवर का वाहन से नियंत्रण हट गया और गाड़ी करीब 400 फीट गहरी खाई में जा गिरी।
खन्नी टॉप क्षेत्र समुद्र तल से करीब 9 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां मौसम बेहद तेजी से बदलता है। संकरी सड़क, तीखे मोड़, गहरी खाइयां और बर्फबारी इस मार्ग को और भी खतरनाक बना देती हैं। हादसे के बाद स्थानीय लोगों और सेना की मदद से घायलों को खाई से बाहर निकाला गया, जबकि कई जवानों को हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया।
देश के नेताओं ने जताया शोक
इस हादसे पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने शहीद जवानों के परिजनों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि देश अपने वीर सपूतों के बलिदान को कभी नहीं भूलेगा। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी इस हादसे को बेहद दुखद बताया है।
परिवार का बड़ा सहारा थे मोहित
सरपंच नरेश ने बताया कि मोहित परिवार का बड़ा चिराग थे। पिता सतपाल खेती-बाड़ी करते हैं, जबकि छोटा भाई जितेंद्र गांव में वाहन चलाने का काम करता है। परिवार में मोहित ही एकमात्र सदस्य थे जो सेना में भर्ती हुए थे। मेहनत, लगन और देशभक्ति के जज्बे के बल पर उन्होंने सेना की वर्दी हासिल की और अंततः देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
ग्रामीणों का कहना है कि मोहित में शुरू से ही सेना में जाने का जुनून था। वे रोज गांव की सड़कों पर दौड़ लगाते थे और देश सेवा के सपने देखते थे। कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई उन्होंने सरकारी स्कूल से की थी। रोजाना गांव से करीब 4 किलोमीटर दूर सिलानी स्थित सरकारी स्कूल पैदल जाकर पढ़ाई करते थे।
आज गांव गिजाड़ौध अपने इस वीर सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए तैयार है। हर आंख नम है, हर दिल गर्व से भरा है और हर जुबां पर बस एक ही बात — शहीद मोहित अमर रहें।

