जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में गुरुवार को भारतीय सेना के लिए एक बेहद दुखद दिन साबित हुआ, जब एक भीषण सड़क हादसे में 10 जवान शहीद हो गए, जबकि 11 जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा उस समय हुआ, जब सेना का एक वाहन भद्रवाह-चंबा इंटरस्टेट रोड पर खन्नी टॉप के पास करीब 400 फीट गहरी खाई में जा गिरा। हादसे के बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई।
इस दर्दनाक हादसे में हरियाणा के यमुनानगर जिले के छछरौली ब्लॉक के गांव शेरपुर निवासी 32 वर्षीय आर्मी जवान सुधीर नरवाल भी शहीद हो गए। गुरुवार देर शाम जैसे ही शहीद सुधीर की शहादत की सूचना गांव पहुंची, पूरा इलाका गमगीन हो गया। गांव शेरपुर में हर आंख नम थी और लोगों को यकीन ही नहीं हो पा रहा था कि हंसता-खेलता जवान अब कभी लौटकर नहीं आएगा।
सीएम नायब सैनी ने जताया शोक
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस हादसे में शहीद हुए झज्जर के मोहित चौहान और यमुनानगर के सुधीर नरवाल की शहादत पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि दुख की इस घड़ी में वे दोनों वीर सपूतों के परिजनों के साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से शहीदों की आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवारों को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
शनिवार को राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
शहीद सुधीर नरवाल के चचेरे भाई सुशील कुमार ने बताया कि सुधीर का पार्थिव शरीर हवाई जहाज से अंबाला कैंट एयरफोर्स स्टेशन लाया जाएगा। वहां से सड़क मार्ग के जरिए उसे यमुनानगर और फिर गांव शेरपुर लाया जाएगा। हालांकि खराब मौसम के चलते पार्थिव शरीर के पहुंचने में देरी हो रही है। मौसम साफ होते ही पार्थिव शरीर को गांव लाया जाएगा। शहीद का अंतिम संस्कार शनिवार को पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ किया जाएगा।
पहले ही उठ चुका था पिता का साया
शहीद सुधीर नरवाल के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। सुधीर दो बहनों के इकलौते भाई थे। उनके पिता हरपाल सिंह का वर्ष 2017 में निधन हो चुका था। पिता के जाने के बाद सुधीर ही परिवार का सहारा बने थे। गांव में लोग लगातार शहीद के घर पहुंचकर परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं, लेकिन मां, पत्नी और मासूम बेटे का दर्द शब्दों में बयां नहीं हो पा रहा।
सुधीर के चचेरे भाई ने बताया कि उनके पिता चाहते थे कि बेटा सेना में न जाकर कोई सुरक्षित सिविल नौकरी करे, लेकिन सुधीर के मन में देश सेवा का जुनून था। उन्होंने कड़ी मेहनत की और वर्ष 2015 में भारतीय सेना में भर्ती होकर अपने सपने को पूरा किया।
मां, पत्नी और सात साल का बेटा रह गया पीछे
सुधीर नरवाल करीब दो साल पहले ही जम्मू-कश्मीर में तैनात हुए थे। परिवार में अब मां उर्मिला देवी, पत्नी रूबी और सात साल का बेटा अयांश ही बचे हैं। मां का सहारा, पत्नी का जीवनसाथी और बेटे का पिता देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गया। इस सोच से गांव के हर व्यक्ति की आंखें भर आ रही हैं।
आखिरी बातचीत में कहा था— जल्द आ रहा हूं
परिजनों के अनुसार सुधीर आखिरी बार दिवाली पर छुट्टी लेकर घर आए थे। 20 नवंबर को वे वापस ड्यूटी पर लौट गए थे। परिवार में 20 फरवरी को एक शादी थी, जिसमें शामिल होने की उन्होंने पूरी तैयारी कर रखी थी। बुधवार को ही उन्होंने मां, पत्नी और बेटे से फोन पर बात की थी और कहा था कि वह जल्द घर आने वाले हैं। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी बातचीत होगी।
हादसे की वजह बनी बर्फीली सड़क
सेना और प्रशासन के अनुसार हादसा सड़क पर जमी बर्फ की वजह से हुआ। डोडा के डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि वाहन चालक ने बर्फीली सड़क पर संतुलन खो दिया, जिससे गाड़ी गहरी खाई में गिर गई। वाहन में सवार 21 जवान ऊपरी पहाड़ी पोस्ट की ओर जा रहे थे। हादसे के बाद स्थानीय लोगों और सेना की मदद से राहत कार्य शुरू किया गया और घायल जवानों को हेलिकॉप्टर से उधमपुर मिलिट्री अस्पताल पहुंचाया गया।
देशभर में शोक, नेताओं ने जताई संवेदना
इस हादसे पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी शोक व्यक्त किया। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी इस हादसे को बेहद दुखद बताया और शहीद जवानों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
डोडा से आई यह खबर एक बार फिर याद दिलाती है कि देश की सीमाओं पर तैनात हमारे जवान किस तरह कठिन हालातों में भी राष्ट्र सेवा में लगे रहते हैं। शहीद सुधीर नरवाल और उनके साथियों का बलिदान देश कभी नहीं भूलेगा।

