
कहा- शिविर में 12 सीसीटीवी लगवाए
Avimukteshwaranand Controversy, (द भारत ख़बर), प्रयागराज: प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। शंकराचार्य के विशेष प्रतिनिधि देवेंद्र पांडे ने बताया, यह हमारी मजबूरी है, क्योंकि शंकराचार्य सड़क पर बैठे हैं। यहां प्रशासन और उसके गुंडे हैं। संत के वेश में यहां शैतान घूम रहे हैं। उनसे शंकराचार्य की जान को खतरा है। रात में आकर वीडियो बनाते हैं।
पकड़े जाने पर कहते हैं कि नोटिस देने आए हैं। इसलिए सुरक्षा के तौर पर शिविर के अंदर और बाहर 12 सीसीटीवी कैमरे लगवाए हैं। वहीं अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत अभी भी खराब है। रात में उन्होंने दवा ली थी। शुक्रवार को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। उन्हें तेज बुखार था। वहीं मेला प्रशासन की ओर से जारी नोटिस के जवाब अविमुक्तेश्वरानंद ने दे दिए है।
अविमुक्तेश्वरानंद ने नकली सनातनियों की पोल खोल दी
वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शंकराचार्य विवाद पर कहा, हमें खुशी है कि अविमुक्तेश्वरानंद डटे हुए हैं। एक-एक सनातनी उनके साथ है। उन्होंने कम से कम नकली सनातनियों की पोल खोल दी। हमारा उनसे सीधा संपर्क है। इससे पहले शुक्रवार को अविमुक्तेश्वरानंद ने डिप्टी सीएम केशव मौर्य को समझदार नेता बताया था। उन्होंने कहा- ऐसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री होना चाहिए, जो समझते हैं कि अफसरों से गलती हुई है। जो अकड़ में बैठा हो, उसे मुख्यमंत्री नहीं होना चाहिए।
शंकराचार्य जी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ गलत टिप्पणी की
श्रृंगबेरपुर पीठाधीश्वर आचार्य रामानुजाचार्य शांडिल्य ने कहा, पुलिस प्रशासन का कृत्य निंदनीय है। प्रशासन ने संत परंपरा का अपमान किया है, ठेस पहुंचाई है। यह महापाप है। प्रशासन इस कृत्य के लिए क्षमा मांगे। शंकराचार्य जी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ गलत टिप्पणी की है। सनातन का चोला ओढ़कर सनातन को ही बदनाम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री सनातन की रक्षा कर रहे हैं, उन्हीं को अविमुक्तेश्वरानंद बदनाम कर रहे हैं। उन्होंने उन्हें बाबर की औलाद कहा, जो सरासर गलत है।
प्रशासन माफी मांगकर विवाद खत्म करें
लगता है कि माघ मेला प्रशासन कहीं न कहीं अपने मुख्यमंत्री को गुमराह कर रहा है। माघ मेले में कथित राजनीति का आगमन हो चुका है। माघ मेला भूमि साधना, आराधना और तप का स्थान है। माघ मेला प्रशासन माफी मांगकर विवाद समाप्त करे।
मर्यादा में रहें अविमुक्तेश्वरानंद
अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत राजू दास ने अविमुक्तेश्वरानंद निशाना साधा। उन्होंने कहा, कौन शंकराचार्य? कहां के शंकराचार्य हैं? अगर शंकराचार्य होते तो सीएम योगी की तुलना औरंगजेब से करते? यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है। भगवे चोले में कालनेमि का रूप हैं। अगर साधु हैं तो मर्यादा में रहें। साधु का काम है गले लगाना और अच्छे काम करना।
मीडिया कर्मी ने पूछा कि अब उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा गया है। इस पर राजू दास ने कहा, यह स्वाभाविक है। रावण ब्राह्मण होने के बाद भी राक्षस था, उसे किसी ने ब्राह्मण नहीं कहा। पूज्य महाराज, अभी भी समय है, संगम में डुबकी लगाकर अपने महापाप का अंत करें।
जैसी सरकार, वैसे उसके मंत्री
यूपी के कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के बयान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पलटवार किया। कहा, जैसी सरकार, वैसे उसके मंत्री। कंस के मंत्री कंस से ज्यादा क्रूर थे। मुखिया को खुश करने के लिए उसके लोग उससे भी आगे बढ़ जाते हैं। हमारे लिए सद्बुद्धि मांगने वाले, भगवान से थोड़ा अपने लिए भी मांग लें। दरअसल, मंत्री नंदी ने कहा था- आदिकाल से जब भी कोई अच्छा काम होता है, उसमें विघ्न डालने वाले जरूर होते हैं। भगवान उन्हें सद्बुद्धि दे।
अविमुक्तेश्वरानंद हज यात्रा पर चले जाएं
राष्ट्रीय हिंदू दल संगठन ने अखाड़ा परिषद को पत्र लिखकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ कई टिप्पणियां की हैं। कहा है कि उनके शिविर को बाबरी गुंबदनुमा आकार दिया जाए और उन्हें हज यात्रा पर भेजा जाए। रोशन पांडेय ने मेला प्रशासन को भी पत्र भेजा है। संगठन का कहना है कि सीएम योगी की औरंगजेब से तुलना करना ठीक नहीं है। वहीं गुरुवार को डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा था, शंकराचार्य जी के चरणों में प्रणाम करता हूं और उनसे स्नान करने की प्रार्थना करता हूं।
मौनी अमावस्या पर हुआ था विवाद
18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोका और पैदल जाने को कहा। विरोध करने पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई। इससे नाराज अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए।
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