6 साल तक चूहों पर किया रिसर्च, तीन दवाओं को मिलाकर तैयार की एक नई थेरेपी
Pancreatic Cancer, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: स्पेन के वैज्ञानिकों ने पैंक्रियाटिक कैंसर का इलाज खोजने का दावा किया है। करीब 6 साल तक चूहों पर चली रिसर्च में उन्होंने तीन दवाओं को मिलाकर एक नई थेरेपी तैयार की, जिससे पैंक्रियाज का ट्यूमर पूरी तरह खत्म हो गया। इलाज के बाद चूहों में कैंसर दोबारा नहीं लौटा। यह रिसर्च नेशनल कैंसर रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिक मारियानो बार्बासिड की अगुवाई में की गई।
इसके नतीजे 27 जनवरी को प्रोसीडिंग्स आॅफ द नेशनल एकेडमी आॅफ साइंसेज जर्नल में प्रकाशित हुए। पैंक्रियाटिक कैंसर को सबसे खतरनाक कैंसरों में माना जाता है, क्योंकि इसके लक्षण बहुत देर से सामने आते हैं। ज्यादातर मामलों में बीमारी तब पकड़ में आती है, जब वह काफी बढ़ चुकी होती है। इसी वजह से इसके सिर्फ 10% मरीज ही 5 साल तक जिंदा रह पाते हैं। एपल के सीईओ स्टीव जॉब्स की 2011 में इसी से मौत हुई थी।
इन तीन दवाओं का किया एक साथ इस्तेमाल
इस नई थेरेपी में वैज्ञानिकों ने एक साथ तीन दवाओं (जेमसिटाबीन, आॅल-ट्रांस रेटिनोइक एसिड और नेराटिनिब) का इस्तेमाल किया। इसका मकसद कैंसर के बचने के कई रास्तों को एक साथ बंद करना था। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इससे कैंसर सेल्स खुद को बदल नहीं पाईं और इलाज असरदार साबित हुआ। मारियानो बार्बासिड पहले भी कह चुके हैं कि पैंक्रियाटिक कैंसर को एक दवा से खत्म नहीं किया जा सकता। उनका मानना है कि यह कैंसर बहुत तेजी से खुद को ढाल लेता है और इसे रोकने के लिए कई रास्तों पर एक साथ हमला करना जरूरी है।
इस तरह काम करती है दवा
रिसर्च के मुताबिक, ये तीनों दवाएं मिलकर कैंसर पर अलग-अलग तरीकों से हमला करती हैं। जेमसिटाबीन तेजी से बढ़ने वाली कैंसर सेल्स को मारती हैं। एटीआरए ट्यूमर के चारों ओर बनी सुरक्षात्मक परत को कमजोर करती है। नेराटिनिब उन सिगनल्स को रोकती है, जिनसे ट्यूमर को बढ़ने की ताकत मिलती है। तीनों दवाओं के साथ इस्तेमाल से कैंसर की सुरक्षा टूट गई और इलाज के बाद कैंसर दोबारा नहीं लौटा। जो वैज्ञानिक इस रिसर्च से जुड़े नहीं थे, उन्होंने भी कहा कि पैंक्रियाटिक कैंसर के मामलों में दोबारा बीमारी लौटे बिना ऐसे नतीजे बहुत कम देखने को मिलते हैं।
पैंक्रियाटिक कैंसर क्या है?
हमारे पेट के पिछले हिस्से में एक मछली जैसा आॅर्गन होता है। खास बात ये है कि ये आॅर्गन और ग्लैंड दोनों है। ये ऐसे एंजाइम और हॉर्मोन रिलीज करता है, जिससे हमारा शरीर स्वस्थ रहता है। पैंक्रियाज की सेल्स शरीर की सभी सेल्स की तरह एक निश्चित पैटर्न में बढ़ती और नष्ट होती हैं। डेड सेल्स को हेल्दी सेल्स खाकर खत्म कर देती हैं।
कैंसर होने पर ये पैटर्न को तोड़कर कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ने लगती हैं और मल्टीप्लाई होने लगती हैं। यही पैंक्रियाटिक कैंसर है। पैंक्रियाटिक कैंसर का सबसे खतरनाक पहलू ये है कि इसमें शुरूआती स्टेज में कोई लक्षण नजर नहीं आता है। इसके लक्षण आमतौर पर तब सामने आते हैं, जब ट्यूमर पाचन तंत्र के दूसरे अंगों को भी प्रभावित करना शुरू कर देता है।

