नई दिल्ली. NEET पेपर लीक मामले को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इसे खत्म करने की बात कही है. इसको तोड़ने के लिए उन्होंने केंद्र सरकार के सामने शर्त रखी है. उन्होंने कहा है कि आंदोलन में शामिल युवाओं के खिलाफ किसी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया जाय. इसके बाद वह अपनी भूख हड़ताल खत्म कर देंगे. अगर ऐसा नहीं किया गया तो उनका अनशन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा.
सोनम वांगचुक 28 जून से NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं. दो दिन पहले उन्हें स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल शिफ्ट किया गया था. वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को लिखे पत्र लिखकर अपनी बात रखी. इसमें कहा कि सरकार यह भरोसा दे कि आंदोलन में हिस्सा लेने वाले किसी भी युवा के खिलाफ दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी केवल एक पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं.

59 साल के सोनम वांगचुक पिछले 25 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं. शनिवार को पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर से हटाकर गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया था. उन्होंने अपना अनशन खत्म करने से इनकार कर दिया.
अपने पत्र में वांगचुक ने बताया कि सोमवार रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह उनसे मेदांता अस्पताल में मिलने पहुंचे थे. उन्होंने दावा किया कि मंत्रियों ने उन्हें आश्वासन दिया है कि सरकार NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को उचित मुआवजा देने पर विचार करेगी. साथ ही संसद में पेपर लीक मामले पर चर्चा कर जवाबदेही तय करने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर भी विचार करने की बात कही गई.
वांगचुक ने कहा कि पिछले कुछ घंटों में करीब 65 सांसदों ने उनसे भूख हड़ताल समाप्त करने का अनुरोध किया है. उन्होंने कहा कि वह भी शिक्षा के क्षेत्र में अपने काम पर लौटना चाहते हैं, लेकिन आंदोलन में शामिल युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना ऐसा नहीं कर सकते. उन्होंने कहा, “अगर सरकार यह भरोसा देती है कि किसी भी युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी, तो मैं विश्वास के साथ अपना अनशन समाप्त कर दूंगा.”

