कहा, भारत और ईयू के बीच हुआ एफटीए अमेरिका को स्पष्ट संकेत
Business News (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : बीते मंगलवार भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर पूरी दुनिया से विशेष प्रतिक्रियाएं आ रहीं हैं। यह समझौता ने केवल भारत और यूरोप के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए कितना अहम है इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि संयुक्त राष्टÑ के महासचिव ने भी इसकी तारीफ की है। इन दोनों पक्षों के बीच हुए इस समझौते को विश्व व्यापार के लिए नई दिशा दिखाने वाता बताया जा रहा है।इसी बीच नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को एक रणनीतिक तालमेल करार दिया।
भारत ने इस समझौते से दिया साफ संदेश
बनर्जी ने कहा कि यह व्यापार समझौता अमेरिका को साफ संदेश देता है कि भारत और यूरोप, वाशिंगटन पर उतना निर्भर नहीं हैं, जितना वह सोचता है। अभिजीत ने कहा, ट्रंप प्रशासन की ओर से लगाए गए ऊंचे टैरिफ के बीच यह व्यापार समझौता वॉशिंगटन के लिए एक रणनीतिक संकेत है। अर्थशास्त्री बनर्जी ने चेतावनी देते हुए कहा कि मदर आॅफ आॅल डील्स कहे जा रहे इस व्यापार समझौते से अपने-आप व्यापक आर्थिक लाभ नहीं मिलेंगे, इसके लिए भारत को अपनी कार्यकुशलता और आपूर्ति व्यवस्था में बड़ा सुधार करना होगा।
इस क्षेत्र में भारत को मिलेगी कठिन चुनौती
बनर्जी ने कहा, भारत टेक्सटाइल, चमड़ा और ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों पर जोर दे रहा है, उनमें परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं। भारत ज्वेलरी और चमड़ा उद्योग में मजबूत है, लेकिन टेक्सटाइल में वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा है। बनर्जी ने असली समस्या आपूर्ति शृंखला और डिलीवरी की गति को बताया। वियतनाम व यूरोपीय संघ (ईयू) ने बृहस्पतिवार को अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का एलान किया।
यह वियतनाम का सर्वोच्च राजनयिक स्तर है। इस उन्नयन से यूरोपीय संघ को अमेरिका, चीन व रूस के समान राजनयिक स्तर प्राप्त हो गया है। यह कदम अमेरिकी शुल्क दबाव के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल के बीच दोनों देशों की तरफ से व्यापार की नई रणनीति बनाने के लिए उठाया गया है। इसकी घोषणा यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने हनोई यात्रा के दौरान की।
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