सुरक्षा के कड़े प्रबंध, कुल 12 करोड़ 77 लाख से ज्यादा मतदाता मतदान करेंगे, आधे मतदाता केंद्र संवेदनशील, हिंसा व गड़बड़ी की आशंका
Bangladesh Election (द भारत ख़बर), ढाका : भारत के पड़ौसी देश बांग्लादेश में पिछले कई माह की उठापटक हो सकता है आने वाले दिनों में समाप्त हो जाए। कल यानी 12 फरवरी को वहां पर आम चुनाव के लिए मतदान होने जा रहा है। जनता को उम्मीद है कि इस चुनाव के बाद देश में एक स्थाई तथा मजबूत सरकार का गठन होगा। ज्ञात रहे कि पिछले कई माह से बांग्लादेश की जनता ने अशांति व हिंसा का दौर देखा है और वहां रह रही हिंदू आबादी ने हिंसा का दंश झेला है। सभी को चुनाव से उम्मीद है कि इसके बाद देश में स्थिति बदलेगी और शांति का दौर शुरू होगा।
चुनाव आयोग के बयान से मची खलबली
चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष कराने की जिम्मेदारी वहां से चुनाव आयोग और सुरक्षा एजेंसियों की है लेकिन चुनाव आयोग का हालिया बयान इस चुनाव और मतदान को लेकर सियासी टकराव और इसकी गंभीरता को उजागर कर रहा है। बांग्लादेश चुनाव आयोग का मानना है कि देश के आधे से ज्यादा मतदान केंद्र जोखिम वाले घोषित किए गए हैं। इसके लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। साथ ही इन केंद्रों पर खास निगरानी भी रखी जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, करीब 90 प्रतिशत मतदान केंद्रों पर सीसीवीटी कैमरे लगाए गए हैं। राजधानी ढाका में तैनात कई पुलिसकर्मी पहली बार बॉडी कैमरा पहनकर ड्यूटी करेंगे, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।
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बूथ सुरक्षा को लेकर ये बोले चुनाव आयुक्त
चुनाव आयुक्त अबुल फजल मोहम्मद सनाउल्लाह ने मंगलवार देर रात मीडिया को बताया कि चुनाव आयोग की सुरक्षा योजना जोखिम के आंकलन पर आधारित है। उन्होंने कहा कि हर इलाके की स्थिति को देखकर सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह चुनाव देश के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी सुरक्षा तैनाती के साथ कराया जा रहा है और तकनीक का भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है।
कुल 43 हजार मतदान केंद्रों में से 24 हजार जोखिम भरे
पुलिस महानिरीक्षक बहादुरुल आलम ने बताया कि देश के करीब 43,000 मतदान केंद्रों में से 24,000 केंद्र उच्च या मध्यम स्तर के जोखिम वाले हैं। पुलिस के अनुसार ढाका के 2,131 मतदान केंद्रों में से 1,614 केंद्र जोखिम वाले हैं। हालांकि, सेना ने एक अलग मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि ढाका शहर में केवल दो केंद्र ही जोखिम भरे हैं। ऐसे में इन आंकड़ों में अंतर को लेकर सवाल भी उठे हैं।
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