रोहतक जिले के महम थाने में जब्त की गई शराब को नष्ट करने के बजाय बाजार में बेचने के आरोपों ने हरियाणा पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की प्रारंभिक जांच में अनियमितता सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है, जबकि थाना प्रबंधक को लाइन हाजिर कर दिया गया है।
यह मामला करीब दस दिन पुराना बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, महम थाने में विभिन्न मामलों में जब्त की गई शराब को नियमानुसार नष्ट किया जाना था। आरोप है कि शराब को पूरी तरह से नष्ट नहीं किया गया और बाहरी व्यक्तियों की मदद से उसे बाजार में बेच दिया गया। इस कथित गड़बड़ी की सूचना जैसे ही रोहतक के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सुरेंद्र भौरिया तक पहुंची, उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल विभागीय जांच के आदेश दिए।
एसपी ने मामले की जांच की जिम्मेदारी उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) गुलाब सिंह को सौंपी। डीएसपी ने थाने के रिकॉर्ड, मालखाने की एंट्री और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ के आधार पर विस्तृत जांच की। जांच रिपोर्ट एसपी को सौंपे जाने के बाद प्रथम दृष्टया अनियमितता पाए जाने पर सख्त प्रशासनिक कदम उठाए गए।
कार्रवाई के तहत थाना प्रबंधक उप-निरीक्षक सुभाष को लाइन हाजिर कर दिया गया है। इसके अलावा ईएचसी ज्योतिस्वरूप, जो मालखाना मोहरर के पद पर तैनात थे, एमएचसी जयभगवान और एसए ईएसआई सतपाल को निलंबित कर दिया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, आगे की जांच में यदि और तथ्य सामने आते हैं तो अतिरिक्त कार्रवाई भी संभव है।
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब्त माल की सुरक्षा और नियमानुसार निस्तारण को लेकर विभाग में स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं। किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले को लेकर दोपहर एक बजे प्रेसवार्ता आयोजित की जाएगी, जिसमें जांच से जुड़े तथ्यों और आगे की कार्रवाई की जानकारी साझा की जाएगी।
इस घटना ने जब्त माल के प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर विभागीय जांच और संभावित आपराधिक कार्रवाई पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कथित रूप से जब्त शराब बाजार तक कैसे पहुंची और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

