
रेशमा और शेरा फिल्म के जरिए ली थी इंडस्ट्री में एंट्री
Sanjay Dutt, (द भारत ख़बर), मुंबई: हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेताओं में शामिल संजय दत्त ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपने पिता और दिवंगत अभिनेता सुनील दत्त की फिल्म रेशमा और शेरा के जरिए एंट्री ली थी। इसमें उन्होंने चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में काम किया था। ये फिल्म साल 1971 में रिलीज हुई थी। उस वक्त उनकी उम्र 12 साल थी। वहीं बतौर लीड एक्टर उन्होंने अपना करियर 22 साल की उम्र में शुरू किया था। उनकी पहली फिल्म लीड एक्टर के रूप में रॉकी थी। ये फिल्म साल 1981 में आई थी।
अपनी पहली ही फिल्म से संजय दत्त ने दर्शकों का दिल जीत लिया था। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 80 और 90 के दशक में अभिनेता ने एक से बढ़कर एक फिल्में दी थीं। इसके बाद भी ये सिलसिला जारी रहा। आगे जाकर उन्होंने सपोर्टिंग रोल भी निभाए, विलेन के किरदारों में भी नजर आए और आज तक निभाते आ रहे हैं। उनका फिल्मी सफर कई शानदार फिल्मों से भरा है, लेकिन अपने 45 साल के करियर में संजय दत्त ने सिर्फ दो बार ही फिल्मफेयर अवॉर्ड पर अपना नाम लिखाया है। आइए जानते हैं कि उन्हें किन दो फिल्मों के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था?
पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड
संजय दत्त को पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड उनकी सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक वास्तव के लिए मिला था। उन्हें अपने करियर का पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड जीतने में 18 साल लग गए थे। संजय दत्त की शानदार फिल्म वास्तव साल 2000 में रिलीज हुई थी। इसके लिए उन्हें बेस्ट एक्टर के फिल्मफेयर अवॉर्ड से नवाजा गया था। उन्होंने अजय देवगन, सलमान खान, आमिर खान और मनोज बाजपेयी जैसे एक्टर को बेस्ट एक्टर कैटिगरी में पछाड़ा था। इसमें संजय ने रघु नाम का दमदार किरदार निभाया था।
दूसरा फिल्मफेयर अवॉर्ड
संजय दत्त ने दूसरा और आखिरी फिल्मफेयर अवॉर्ड अपनी एक और बेहतरीन फिल्म मुन्ना भाई एमबीबीएस के लिए जीता था। ये पिक्चर साल 2003 में रिलीज हुई थी। संजय को कॉमिक रोल के लिए बेस्ट परफॉर्मेंस का अवॉर्ड दिया गया था। 23 साल पुरानी इस रोमांटिक ड्रामा फिल्म का डायरेक्शन दिग्गज डायरेक्टर राजकुमार हिरानी ने किया था।
