पिछले साल जुलाई में किए थे दोनों देशों ने हस्ताक्षर, एक अप्रैल से लागू होने की उम्मीद
Business News (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : भारत इस साल वैश्विक स्तर पर अपने व्यापारिक रिश्तों में बड़े बदलाव कर रहा है। साल के शुरू में ही जहां भारत और यूरोपीय संघ में बड़ा व्यापारिक समझौता हो चुका है वहीं अमेरिका के साथ भी अगले माह द्विपक्षीय व्यापार समझौता होने की पूरी संभावना है।
इसी बीच भारत और ब्रिटेन पिछले साल किए व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए) को जल्द लागू करने की पूरी तैयारी में हैं। ज्ञात रहे कि भारत और ब्रिटेन के बीच जुलाई 2025 में हस्ताक्षरित व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए) हुआ था। दोनों देशों के बीच इस समझौते को समानांतर रूप से लागू करने की तैयारी चल रही है।
यह है समझौते का प्रारूप
समझौते के तहत भारत के 99% निर्यात ब्रिटेन के बाजार में शून्य शुल्क पर प्रवेश करेंगे। वहीं, भारत में ब्रिटिश उत्पादों, जैसे कार व स्कॉच व्हिस्की, पर आयात शुल्क में चरणबद्ध कमी की जाएगी। स्कॉच व्हिस्की पर शुल्क 150% से घटाकर 75% किया जाएगा और 2035 तक इसे 40% तक लाया जाएगा। आॅटोमोबाइल पर आयात शुल्क पांच वर्षों में घटाकर 10% किया जाएगा, जो अभी 110% तक है। समझौते के तहत भारत ने चॉकलेट, बिस्कुट और सौंदर्य प्रसाधन जैसे उपभोक्ता उत्पादों के लिए बाजार खोला है, जबकि भारतीय वस्त्र, जूते, रत्न-आभूषण, खेल सामग्री व खिलौनों को ब्रिटेन में पहुंच मिलेगी।
दोहरा अंशदान संधि पर भी हैं हस्ताक्षर
दोनों देशों ने दोहरा अंशदान संधि पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जिससे अस्थाई कर्मियों को सामाजिक अंशदान दो बार नहीं देना होगा। समझौते को लागू करने से पहले ब्रिटेन की संसद की मंजूरी आवश्यक है। वहां हाउस आॅफ कॉमन्स और हाउस आॅफ लॉर्ड्स में इस पर बहस और समीक्षा चल रही है। इसका उद्देश्य 2030 तक 56 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है।
भारतीय बाजार में निवेशकों की मजबूत वापसी
फरवरी की शुरूआत में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने भारतीय शेयर बाजार में मजबूत वापसी दर्ज की है। महीने के पहले पंद्रह दिनों में ही उन्होंने 19,675 करोड़ रुपये का निवेश कर दिया। लगातार तीन महीनों तक हुई भारी बिकवाली के बाद अब घरेलू बाजार में उनकी रुचि फिर बढ़ती दिख रही है। विशेषज्ञ इसके पीछे अमेरिका-भारत व्यापार समझौते की उम्मीदों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में आई नरमी को प्रमुख वजह मान रहे हैं।
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