
कहा- सरकार ने कैंडिडेट्स को आरक्षण से बाहर करने के लिए गलत पैमाना अपनाया
OBC Creamy Layer, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि ओबीसी आरक्षण में क्रीमी लेयर का फैसला केवल माता-पिता की आय के आधार पर नहीं किया जा सकता। माता-पिता या अभिभावकों के पद (पोस्ट) और सामाजिक स्थिति (स्टेटस) को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। साथ ही कहा कि अगर सरकारी कर्मचारियों के बच्चों और प्राइवेट या पीएसयू कर्मचारियों के बच्चों को अलग-अलग तरीके से आरक्षण दिया जाए तो यह अनुचित भेदभाव होगा। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने यह फैसला दिया। कोर्ट ने केंद्र सरकार की अपील को खारिज करते हुए दिल्ली, मद्रास और केरल हाईकोर्ट के फैसलों को सही माना।
माता-पिता की सैलरी को आधार मानकर क्रीमी लेयर में गया डाला
कोर्ट ने उन यूपीएसपी कैंडिडेट्स को बड़ी राहत दी है, जिन्हें सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बावजूद नौकरी नहीं दी गई थी। सरकार ने उनके माता-पिता की सैलरी को आधार मानकर उन्हें क्रीमी लेयर की श्रेणी में डाल दिया था। कोर्ट ने साफ किया कि सरकार ने कैंडिडेट्स को आरक्षण से बाहर करने के लिए गलत पैमाना अपनाया।
ओबीसी श्रेणी के आरक्षण के आधार पर नौकरी देने के निर्देश
यह पूरा विवाद उन कैंडिडेट्स से जुड़ा है जिनके माता-पिता पब्लिक सेक्टर्स (पीएसयू), बैंक या इसी तरह के संस्थानों में काम करते थे। इन कुछ कैंडिडेट्स ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी। वे सिविल सेवा परीक्षा में ओबीसी (नॉन क्रीमी लेयर) का लाभ चाहते थे। ट्रिब्यूनल ने सरकार को आदेश दिया था कि उन्हें उनके ओबीसी श्रेणी के आरक्षण के आधार पर नौकरी दी जाए।
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