Nepal Breaking,(द भारत ख़बर), काठमांडू: नेपाल पुलिस ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार कर लिया है। सितंबर-2025 में जेड-जेन के नेतृत्व में हुए भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों को कथित तौर पर दबाने से जुड़े एक कथित ‘गैर-इरादतन हत्या’ के आरोप में उनकी गिरफ्तारी भक्तपुर स्थित उनके आवास से की गई। विरोध प्रदर्शनों के दौरान, कुल 77 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि अरबों रुपए की सरकारी और निजी संपत्ति नष्ट हो गई थी।
गिरफ़्तारी के लिए पर्याप्त आधार नहीं
केपी ओली की पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी आफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (सीपीएन-यूएमएल ) ने अपने नेता की गिरफ्तारी का विरोध किया है। सदस्य रघुजी पंत ने शुक्रवार को कहा कि जिस जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर केपी ओली को गिरफ़्तार किया गया है, उसमें गिरफ़्तारी के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं और आरोप लगाया कि यह रिपोर्ट किसी खास इरादे से तैयार की गई है।
आपातकालीन सचिवालय बैठक बुलाई
पूर्व विदेश मंत्री और पार्टी के नेता प्रदीप ग्यावली ने भी ओली की गिरफ़्तारी पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होनें कहा, यह हमारे चेयरमैन के खिलाफ लिया गया एक राजनीतिक बदला है। गिरफ्तारी को लेकर सीपीएन-यूएमएल ने एक आपातकालीन सचिवालय बैठक बुलाई है।
पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक भी हो चुके हैं अरेस्ट
नेपाली कांग्रेस के नेता और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी इससे पहले उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था। ये गिरफ्तारियां गृह मंत्रालय द्वारा दर्ज कराई गई एक औपचारिक शिकायत के बाद हुई हैं, जिसके चलते जांच शुरू हुई और गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए।
इस वजह से की जा रही गिरफ्तारियां : पुलिस
‘काठमांडू पोस्ट’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई पूर्व विशेष अदालत के न्यायाधीश गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता वाले आयोग द्वारा की गई सिफारिशों को लागू करने के लिए की जा रही है। आयोग ने सिफारिश की है कि ओली, लेखक और तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक चंद्र कुबेर खापुंग पर ‘राष्ट्रीय दंड संहिता’ की धारा 181 और 182 के तहत ‘आपराधिक लापरवाही’ का आरोप लगाया जाए, और उनके लिए 10 साल तक की जेल की सजा का प्रस्ताव रखा जाए।
विरोध प्रदर्शनों में मारे गए थे 77 लोग, अरबों का नुकसान
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का फैसला किया गया, जिससे रिपोर्ट में नामित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। बता दें कि बालेंद्र ने शुक्रवार को ही पीएम पद की शपथ ली थी।
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