
Parliament, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: संसद में बजट सत्र का दूसरे चरण चल रहा है और इस बीच आज विपक्ष के सांसदों ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA Bill, 2026) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी सदस्य संसद परिसर मेें मकर द्वार पर एकत्रित हुए और विरोध प्रदर्शन कर उन्होंने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को वापस लेने की मांग की।
अल्पसंख्यकों व एनजीओ पर पड़ सकता है असर
कांग्रेस सांसद हिबी ईडेन ने एफसीआरए विधेयक, 2026 को एक कठोर कानून बताया। उन्होंने कहा, यह एक कठोर कानून है जो न केवल अल्पसंख्यकों के हितों को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि भारत में चल रहे कई एनजीओ के हितों को भी प्रभावित करेगा। कांग्रेस सांसद ने कहा, हम इसकी कड़ी निंदा और विरोध करेंगे और इस विधेयक को वापस लेने की मांग करेंगे।
भजापा की तरफ से सोची-समझी साजिश : प्रेमचंद्रन
रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने कहा, यह ईसाई या किसी खास समुदाय का सवाल नहीं है। यह भजापा की तरफ से एक सोची-समझी साजिश है, जिसका मकसद अल्पसंख्यकों के विशेषाधिकार और अधिकार छीनना है। कांग्रेसी सांसद धर्मवीर गांधी ने कहा, हम इस विधेयक के खिलाफ हैं। यह एक निष्पक्ष फैसला होना चाहिए जिससे समाज के सभी वर्गों को फायदा हो। यह चुनिंदा नहीं हो सकता।
अमित शाह आज लोकसभा में पेश करेंगे प्रस्ताव
बता दें कि विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को आज लोकसभा में विचार और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह यह प्रस्ताव पेश करेंगे कि इस विधेयक पर चर्चा की जाए, जिसका उद्देश्य विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 में संशोधन करना है, और इसका लक्ष्य भारत में विदेशी अंशदान में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे प्रश्नकाल से शुरू हो गई है।
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