
मशहूर दिग्गज पार्श्वगायिका आशा भोसले का 92 वर्ष की उम्र में निधन
Singer Asha Bhosle Passes Away, (द भारत ख़बर), मुंबई: भारतीय संगीत जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। सुरों की मल्लिका के नाम से मशहूर दिग्गज पार्श्वगायिका आशा भोसले का निधन हो गया है। बताया जा रहा है कि वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थीं और मुंबई के कैंडी ब्रीच अस्पताल में भर्ती थीं।
92 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। आशा भोसले सिर्फ एक गायिका ही नहीं, बल्कि एक युग थीं। उनकी आवाज में जो मिठास, विविधता थी, वह उन्हें अन्य गायकों से अलग बनाती थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनकी इस अद्भुत प्रतिभा के साथ उनकी कामयाबी उनके जन्म नक्षत्र से भी जु़ड़ी है जिसने उन्हें इतनी शोहरत दिलवाई। आइए उनके जन्म नक्षत्र के बारे में जानते हैं।
भरणी नक्षत्र में हुआ था जन्म
ज्योतिषीय गणना के अनुसार आशा भोसले का जन्म भरणी नक्षत्र में हुआ था। उनका जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। उनकी चंद्र राशि मेष मानी जाती है। ज्योतिष शास्त्र में भरणी नक्षत्र का विशेष महत्व बताया गया है। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह होता है, जिसे कला, सौंदर्य, संगीत और ऐश्वर्य का कारक माना जाता है। यही कारण है कि इस नक्षत्र में जन्मे लोग अक्सर रचनात्मक क्षेत्रों में बड़ी सफलता हासिल करते हैं।
क्यों खास माना जाता है भरणी नक्षत्र?
भरणी नक्षत्र को ज्योतिष में ऊर्जा, रचनात्मकता और आकर्षण का प्रतीक माना जाता है। इस नक्षत्र में जन्मे लोगों में कुछ खास गुण देखे जाते हैं। शुक्र ग्रह के प्रभाव के कारण ऐसे लोगों की आवाज, अभिव्यक्ति और प्रस्तुति में एक खास निखार देखने को मिलता है।
भरणी नक्षत्र क्या होता है?
भरणी नक्षत्र वैदिक ज्योतिष के 27 नक्षत्रों में दूसरा नक्षत्र माना जाता है। यह नक्षत्र मेष राशि के अंतर्गत आता है और इसका स्वामी शुक्र ग्रह होता है, जो कला, सौंदर्य, प्रेम और ऐश्वर्य का कारक माना जाता है।
भरणी नक्षत्र का स्वामी और प्रभाव
इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह है, इसलिए इसका प्रभाव व्यक्ति को सुंदरता, विलासिता, प्रेम और रचनात्मकता की ओर ले जाता है। ऐसे लोग अक्सर कला, मनोरंजन और फैशन जैसे क्षेत्रों में सफल होते हैं।
ज्योतिष में महत्व
भरणी नक्षत्र को एक ऊजार्वान और परिवर्तनकारी नक्षत्र माना जाता है। यह जीवन में नए आरंभ, जिम्मेदारी और कर्म के फल से जुड़ा होता है। इसलिए भरणी नक्षत्र उन लोगों का प्रतिनिधित्व करता है जिनमे आत्मबल और कुछ अलग करने का जुनून होता है।
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