किसानों की चिंता बढ़ी, देश की आधी से ज्यादा खेती मानसून पर निर्भर
Monsoon Update (द भारत ख़बर), नई दिल्ली : पिछले दिनों उत्तर पश्चिम भारत में पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के चलते शुरू हुआ बारिश का दौर समाप्त हो चुका है। इसके साथ ही अब गर्मी जोर पकड़ने लगी है। तापमान में तेजी से वृद्धि हो रही है और जल्द ही लू का दौर शुरू होने वाला है। इसी बीच भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने वर्ष 2026 में मानसून को लेकर जो भविष्यवाणी की है।
उससे देश भर के किसानों की चिंता बढ़ गई है। दरअसल सोमवार को आईएमडी ने इस साल का पहला मानसून अपडेट करते हुए इसकी संभावित स्थिति का विवरण साझा किया। आईएमडी ने अपने बुलेटिन में बताया कि इस साल मानसून के कमजोर रहने की संभावना है। दो साल अच्छी बारिश होने के बाद इस साल सामान्य से कम बारिश होने के पूवार्नुमान ने चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि देश की लगभग आधी खेती मानसून पर निर्भर है। धान, दालों और तिलहन की बुवाई और पैदावार पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
आईएमडी ने यह अनुमान जताया
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने सोमवार को अपना पहला आधिकारिक अनुमान जारी किया। इसमें कहा गया है कि इस वर्ष देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) के दौरान होने वाली वर्षा सामान्य से कम (लगभग सेंटीमीटर) रहने की संभावना है, जो भारत में मौसमी बारिश का दीर्घकालिक औसत (एलपीए-1971-2020) 87 सेंटीमीटर का लगभग 92 फीसदी है। एलपीए के 90 से 95% के बीच की बारिश को सामान्य से कम माना जाता है। निजी एजेंसी स्काईमेट ने भी करीब 94% बारिश का अनुमान लगाया है।
ये बोले आईएमडी के महानिदेशक
आईएमडी के महानिदेशक डॉ. एम महापात्रा ने प्रेस वार्ता में कहा कि मात्रात्मक रूप से पूरे देश में मौसमी वर्षा एलपीए का 92 प्रतिशत’ रहने की संभावना है, जिसमें 5 फीसदी की कमी- बेसी हो सकती है। पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा होने की उम्मीद है।
भारत के लिए मानसूनी बारिश अहम भारत की कुल वर्षा का लगभग 75 प्रतिशत मानसून के मौसम में होता है, जो सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत उत्पादन के लिए आवश्यक है। लगभग 64 प्रतिशत भारतीय कृषि पर निर्भर हैं, जो मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिम मानसून पर निर्भर है क्योंकि कुल बोए गए क्षेत्र का केवल लगभग 55 प्रतिशत ही सिंचाई के अंतर्गत आता है। देश के विभिन्न भागों में जलाशयों के भरने के लिए भी मानसूनी वर्षा महत्वपूर्ण है, जिनसे पेयजल की आपूर्ति होती है।
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