संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि इस समुद्री मार्ग से जहाजों को बिना रोक जाने दिया जाए
Strait of Hormuz (द भारत ख़बर), न्यूयॉर्क : अमेरिका और ईरान तनाव के चलते करीब डेढ माह से ज्यादा समय से होर्मुज जलडमरूमध्य बंद है। इससे पूरी दुनिया की सप्लाई चेन पर विपरीत असर पड़ा है। इसी बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की अपील की है। सुरक्षा परिषद में समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि इस रास्ते से जहाजों के आने-जाने की आजादी का पूरा सम्मान होना चाहिए।
हालांकि ईरान भी शर्तों के साथ होर्मुज खोलने को राजी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक में ईरान के उस ताजा प्रस्ताव पर चर्चा हुई जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की बात कही गई है। हालांकि ईरान ने इसके बदले में उस पर लगी आर्थिक पाबंदियां हटानी की शर्त रखी है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया है। हालांकि ट्रंप इसे मानने के मूड में नहीं दिख रहे है।
ये बोले संयुक्त राष्ट्र महासचिव
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने जोर देकर कहा कि इन नियमों को बिना किसी देरी के लागू करना जरूरी है। इसको लेकर गुटेरेस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने के नौवहन अधिकारों और स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए। मैं सभी पक्षों से अपील करता हूं जलडमरूमध्य खोलें। जहाजों को गुजरने दें। कोई टोल न लगाएं। कोई भेदभाव न करें। व्यापार फिर से शुरू होने दें। वैश्विक अर्थव्यवस्था को फलने-फूलने दें। सुरक्षित, निर्बाध आवागमन आर्थिक और मानवीय रूप से अत्यंत आवश्यक है।’
दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जल मार्ग
बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसके अलावा, दुनिया की पांचवां हिस्सा प्राकृतिक गैस और लगभग एक-तिहाई खाद का व्यापार भी यहीं से होता है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि इस रास्ते को सुरक्षित और खुला रखना आर्थिक और मानवीय नजरिए से बहुत आवश्यक है। इस समुद्री रास्ते में आई रुकावट के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। साथ ही ऊर्जा और बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सामान लाने-ले जाने का खर्च और बीमा की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं। कोरोना महामारी और यूक्रेन संकट के बाद अब यह सप्लाई चेन की सबसे बड़ी समस्या बन गई है।
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