हरियाणा में शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के दाखिले को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। Haryana Education Department ने राज्य के सभी 4703 निजी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे 21,752 आरक्षित सीटों पर हर हाल में 9 मई 2026 तक दाखिले सुनिश्चित करें। आदेश की अनदेखी करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द करने तक की चेतावनी दी गई है।
राज्यभर में 30 अप्रैल से आरटीई के तहत दाखिला प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन कई जिलों से शिकायतें सामने आई हैं कि कुछ निजी स्कूल जानबूझकर प्रक्रिया में देरी कर रहे हैं। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल तकनीकी या मनमाने कारणों का हवाला देकर पात्र बच्चों को प्रवेश देने से बच रहे हैं। इन शिकायतों के बाद विभाग ने सभी जिलों को कड़ी निगरानी के निर्देश जारी कर दिए हैं।
दाखिलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया है। अब हर निजी स्कूल को अपने MIS लॉगिन के माध्यम से रोजाना प्रत्येक छात्र की स्थिति अपडेट करनी होगी। उन्हें यह बताना अनिवार्य होगा कि आवेदन स्वीकार किया गया है या खारिज। यदि किसी छात्र का दाखिला अस्वीकार किया जाता है, तो उसका स्पष्ट और वैध कारण भी पोर्टल पर दर्ज करना होगा। विभाग ने साफ कर दिया है कि केवल वही कारण मान्य होंगे जो RTE नियमों के अनुरूप हों, अन्यथा कार्रवाई तय है।
सरकार ने यह भी निर्देश दिए हैं कि दाखिले में पात्र विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाए। खासतौर पर कक्षा पहली, पूर्व-प्राथमिक और प्राथमिक स्तर की 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर सबसे पहले उन बच्चों को प्रवेश देना होगा, जो स्कूल से एक किलोमीटर के दायरे में रहते हैं। वहीं, तीन किलोमीटर के दायरे में रहने वाले बच्चों को स्वैच्छिक प्रवेश देने पर सरकार नियमानुसार स्कूलों को प्रतिपूर्ति भी करेगी।
जिला और ब्लॉक स्तर पर मॉनिटरिंग कमेटियों को सक्रिय कर दिया गया है, जिन्हें हर शिकायत का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी मामले का समाधान पांच दिनों के भीतर नहीं होता, तो उसे प्रथम अपीलीय समिति और फिर अंतिम अपीलीय प्राधिकरण के पास भेजा जाएगा।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि शुरुआती दाखिले अस्थायी माने जाएंगे और अंतिम पुष्टि दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही होगी। स्कूल स्तर पर गठित समितियों को तय मानकों के आधार पर ही दस्तावेजों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी पात्र बच्चे के साथ अन्याय न हो सके।
सरकार की इस सख्ती को शिक्षा के अधिकार को जमीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे हजारों जरूरतमंद बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाई का अवसर मिल सकेगा।

