ट्रंप के टैरिफ को अमेरिका की संघीय व्यापार अदालत ने बताया अवैध
US Tariff Policy (द भारत ख़बर), वॉशिंगटन : अप्रैल 2027 से पूरी दुनिया के लिए व्यापार क्षेत्र में जो सबसे बड़ा डर का प्रयाय बन चुका है वह है अमेरिकी टैरिफ। अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे टैरिफ से दुनिया भर के देश परेशान थे। इसी बीच गत दिवस अमेरिका की एक संघीय व्यापार अदालत ने अमेरिकी राष्टÑपति द्वारा लगाए गए टैरिफ को अनुचित व अवैध करार दे दिया है।
अदालत का कहना है कि वह अमेरिकी व्यापार कानूनों का सीधा उल्लंघन है। अदालत के इस फैसले के बाद ट्रंप एक बार फिर से बैकफुट पर आ गए हैं। अब देखना यह होगा की क्या आने वाले दिनों में अमेरिका द्वारा लगाया जा रहा टैरिफ पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा या फिर ट्रंप इसे लेकर कोई नया नियम तय करेंगे।
अदालत ने अपने फैसले में यह कहा
अमेरिकी संघीय अदालत ने सात मई को दो-एक के बहुमत से दिए गए एक अहम फैसले में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए 10 प्रतिशत के वैश्विक टैरिफ को कानून के खिलाफ बताते हुए रद्द कर दिया है। ट्रंप ने ये टैरिफ 24 फरवरी को 150 दिनों के लिए लागू किए थे, जो अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके पहले के करों को रद्द करने के ठीक बाद लगाए गए थे। अदालत का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ने इन करों को लगाकर 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत कांग्रेस द्वारा दी गई शक्तियों का उल्लंघन किया है।
भारत को द्विपक्षीय समझौते का इंतजार करना चाहिए
व्यापार विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि अमेरिकी अदालतों में ट्रंप प्रशासन को मिल रहे इन झटकों के कारण अमेरिका की टैरिफ व्यवस्था में भारी अनिश्चितता पैदा हो गई है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, जब तक अमेरिका अपनी व्यापार प्रणाली को कानूनी रूप से स्थिर और भरोसेमंद नहीं बना लेता, तब तक भारत को द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए इंतजार करना चाहिए।
उन्होंने आगाह किया है कि अमेरिका अपने मोस्ट-फेवर्ड-नेशन (एमएफएन) टैरिफ को कम करने के लिए तैयार नहीं है, लेकिन वह चाहता है कि भारत अपने आयात शुल्क खत्म कर दे। ऐसी स्थिति में भारत द्वारा किया गया कोई भी समझौता एकतरफा हो सकता है, जहां भारत को बाजार तक पहुंच देने के बदले कोई सार्थक लाभ नहीं मिलेगा।
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